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पता ही नहीं था केन्या में सूखे का संकट कितना भयावह हो चुका है, इस तस्वीर ने बता दिया

भूख-प्यास से मारे गए इन जिराफों की तस्वीर ने कइयों को झकझोर दिया है.

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केन्या में भूख-प्यास से मृत पड़े कुछ जिराफ (फोटो: Ed Ram/ Getty Images)
केन्या में सूखे के चलते हालात बेहद खराब हो चले हैं. एक तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान केन्या के इस संकट की ओर खींचा है. इसमें सूखी जमीन पर छह जिराफ़ों के शव दिख रहे हैं. तस्वीर के वायरल होने के बाद दुनियाभर में केन्या को लेकर चिंता जताई जा रही है.

किसने खींची तस्वीर?

झकझोर देने वाली इस तस्वीर को फोटो जर्नलिस्ट एड रैम (Ed Ram) ने खींचा है. बीती 13 दिसंबर को उन्होंने इसे अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया. इसके बाद से ही दुनियाभर में ये तस्वीर वायरल हो रही है. कई पर्यावरणविद अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं. ब्रिटिश अखबार द गार्डियन के मुताबिक तस्वीर केन्या के उत्तर-पूर्वी शहर वजीर स्थित वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी की है. बताया जा रहा है कि जिराफ पास के लगभग सूख चुके जलाशय से पानी पीने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान उनके पैर कीचड़ में फंस गए. भूख-प्यास ने उन्हें कमजोर कर इतना दुर्बल कर दिया था कि खुद को कीचड़ से बाहर निकालने की ताकत भी उनमें नहीं बची थी. आखिरकार वहीं उनकी मौत हो गई.
अखबार के मुताबिक मौत के बाद सभी जिराफ के शवों को वहां से ले जाया गया ताकि जलाशय के पानी को दूषित होने से बचाया जा सके. बाद में एड रैम ने अपने कैमरे से इन जिराफ के शवों का एरीयल शॉल ले लिया जो अब पूरी दुनिया में शेयर किया जा रहा है. इसके अलावा रैम ने इन जानवरों की और तस्वीरें भी लीं जो केन्या में सूखे के संकट को लेकर लोगों का ध्यान खींच रही हैं.
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(फोटो: Ed Ram/ Getty Images)

'ये तस्वीर डरावनी है'

इन तस्वीरों को देखने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने ट्विटर पर चिंता जाहिर की है. कई यूजर्स ने क्लाइमेट चेंज को इसका जिम्मेदार बताया है. एजे थ्रीट नाम के एक ट्विटर यूजर लिखते हैं,
"जीसस, जितना हमने सोचा था ये उससे भी बुरा है. हमें वातावरण को बिगड़ने से रोकने के लिए कुछ करना होगा"

 


जिया विंस लिखते हैं,
"मैंने भी तुरकाना के नजदीक ये दृश्य देखा था. गायें, बकरियां और जिराफ़ मरे पड़े थे. उस दुर्गंध को भुला नहीं सकता"
एक और ट्विटर यूजर विल ब्राउन ने एड रैम का नाम लेते हुए कहा,
"एड, ये तस्वीर डरावनी है."

 


केन्या की समाचार वेबसाइट 'द स्टार' के मुताबिक वहां के बोर-अल्गी जिराफ अभयारण्य से जुड़े इब्राहिम अली ने बताया कि इस सूखे का सबसे ज्यादा खतरा जंगली जानवरों को है. क्योंकि पालतू जानवरों की देखभाल तो की जा रही है, लेकिन इलाके में जंगली जानवरों के खाने-पीने की कमी हो गई है. इसीलिए वे सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. अली का कहना है कि पशु पालने वाले किसानों की आजीविका पर भी इस सूखे का बेहद बुरा असर हुआ है.
'द स्टार' की रिपोर्ट के मुताबिक, सूखे से 4000 जिराफों के मारे जाने का खतरा है. इस बारे में इब्राहिम अली बताते हैं,
"नदी के किनारे खेती की जा रही है जिसने जिराफों को पानी तक पहुंचने से रोक दिया है. इससे स्थिति और खराब हो गई है."

इंसानों पर भी जान का खतरा

केन्या में सूखे का असर केवल जानवरों पर ही नहीं बल्कि वहां के लोगों पर भी हो रहा है. अल जजीरा के मुताबिक, सितंबर से केन्या के उत्तरी हिस्से में सामान्य से 30 प्रतिशत कम बारिश हुई है. इसी कारण ये इलाका गंभीर सूखे की चपेट में है. देश के सूखा प्रबंधन प्राधिकरण ने सितंबर में ही चेतावनी दे दी थी कि इस संकट के कारण लगभग 21 लाख केन्याई भुखमरी का सामना कर रहे हैं. राष्ट्रपति उहुरू केन्याटा ने सितंबर में ही सूखे को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया था. वहीं मंगलवार, 13 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि केन्या के 29 लाख लोगों को अभी भी मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है.

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