डीएम ने महिलाओं के साथ भी ऐसा ही किया. जब वो टट्टी कर हाथ धो रही थीं, डीएम साहब ने उनको कहा कि घर के मर्दों से घर में ही टट्टीघर बनवाने के लिए कहें. उनके साथ भी तसवीरें खिंचवाईं. डीएम के साथ आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग की कुछ महिलाएं भी थीं. असल में डीएम साहब का मानना है कि उनका ये 'गांधीगिरी' अंदाज लोगों को इतना शर्मसार कर देगा कि वो घर में टट्टीघर बनवा लेंगे. लेकिन डीएम साहब भूल गए कि गांधीगिरी का मतलब किसी को अधनंगी हालत में उठा कर उसकी फोटो खींचना नहीं है. न ही एक दर्जन लोगों के साथ किसी पर ताने कसना है. गांव-गांव जा कर मोटिवेशन वगैरह देना अच्छी बात है. चौपाल लगाना, लोगों की समस्याएं सुनना और भी अच्छी बात है. लेकिन सीटियां और ताने मार कर लोगों को अधनंगी हालत में बेइज्जत करना नहीं.डीएम साहब ने टट्टी करते लोगों को उठाया, खींची तस्वीरें
कौशांबी के डीएम का मानना है ये 'गांधीगिरी' है
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फोटो - thelallantop
लोगों को खुले में पॉटी करने से रोकने के लिए कौशांबी जिले के डीएम अखंड प्रताप सिंह एक नया तरीका ले कर आए हैं. ये अपनी टीम लेकर निकलते हैं. गांवों में छापा मारते हैं. और खुले में टट्टी करने वालों को रंगे हाथ पकड़ते हैं. डीएम साहब का मकसद तो अच्छा है. लेकिन तरीका ठीक नहीं. ये टट्टी कर रहे लोगों के पास पहुंच कर उनपर फूल बरसाते है. ताने मारते हैं. टट्टी के बीच से उठा कर फोटो खींचते हैं. पूरी तरह शर्मसार कर टट्टी पर मिट्टी डलवाते हैं. और वीडियो बनवा लेते हैं. बुधवार सुबह गांव के जुम्मन चचा खुले टट्टी करने बैठे ही थे की डीएम साहब की टीम ने उन्हें घेर कर सीटियां और तालियां बजाने लगे. 65 साल के जुम्मन पैंट सही करते हुए उठे तो डीएम साहब से उन्हें फूल दिए. इससे पहले जुम्मन कुछ समझ पाते, उन पर फूलों की बारिश होने लगी. उसी अधनंगी हालत में जुम्मन का वीडियो बना लिया गया. जब जुम्मन ने शर्मसार होकर सिर झुका लिया. तो डीएम साहब ने उनको घर में टट्टीघर बनवाने के लिए कहा.
डीएम ने महिलाओं के साथ भी ऐसा ही किया. जब वो टट्टी कर हाथ धो रही थीं, डीएम साहब ने उनको कहा कि घर के मर्दों से घर में ही टट्टीघर बनवाने के लिए कहें. उनके साथ भी तसवीरें खिंचवाईं. डीएम के साथ आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग की कुछ महिलाएं भी थीं. असल में डीएम साहब का मानना है कि उनका ये 'गांधीगिरी' अंदाज लोगों को इतना शर्मसार कर देगा कि वो घर में टट्टीघर बनवा लेंगे. लेकिन डीएम साहब भूल गए कि गांधीगिरी का मतलब किसी को अधनंगी हालत में उठा कर उसकी फोटो खींचना नहीं है. न ही एक दर्जन लोगों के साथ किसी पर ताने कसना है. गांव-गांव जा कर मोटिवेशन वगैरह देना अच्छी बात है. चौपाल लगाना, लोगों की समस्याएं सुनना और भी अच्छी बात है. लेकिन सीटियां और ताने मार कर लोगों को अधनंगी हालत में बेइज्जत करना नहीं.
डीएम ने महिलाओं के साथ भी ऐसा ही किया. जब वो टट्टी कर हाथ धो रही थीं, डीएम साहब ने उनको कहा कि घर के मर्दों से घर में ही टट्टीघर बनवाने के लिए कहें. उनके साथ भी तसवीरें खिंचवाईं. डीएम के साथ आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग की कुछ महिलाएं भी थीं. असल में डीएम साहब का मानना है कि उनका ये 'गांधीगिरी' अंदाज लोगों को इतना शर्मसार कर देगा कि वो घर में टट्टीघर बनवा लेंगे. लेकिन डीएम साहब भूल गए कि गांधीगिरी का मतलब किसी को अधनंगी हालत में उठा कर उसकी फोटो खींचना नहीं है. न ही एक दर्जन लोगों के साथ किसी पर ताने कसना है. गांव-गांव जा कर मोटिवेशन वगैरह देना अच्छी बात है. चौपाल लगाना, लोगों की समस्याएं सुनना और भी अच्छी बात है. लेकिन सीटियां और ताने मार कर लोगों को अधनंगी हालत में बेइज्जत करना नहीं.Add Lallantop as a Trusted Source

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