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कठुआ गैंगरेप केस का नाबालिग आरोपी भी नहीं बचेगा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एडल्ट की तरह ट्रायल चलेगा

कठुआ गैंगरेप-हत्या मामले के छह दोषियों को सजा मिल चुकी है.

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इसी मंदिर में बच्ची को रखा गया था. (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ गैंगरेप-हत्या मामले के अंतिम आरोपी को नाबालिग मानने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा है कि आरोपी शुभम सांगरा को वयस्क मानते हुए उसके खिलाफ मुकदमा चलेगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को नाबालिग घोषित करने वाले निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया है. शीर्ष अदालत ने राय देते हुए कहा कि अगर आरोपी की उम्र से जुड़े साक्ष्य ना हों तो अदालत को मेडिकल प्रोफेशनल की राय लेने पर विचार करना चाहिए.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने कहा,

"आरोपी की आयु सुनिश्चित करने के लिए कोई भी निर्णायक साक्ष्य नहीं होने की सूरत में मेडिकल ओपिनियन लिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए. सीजेएम कठुआ द्वारा दिए गए आदेश को रद्द किया जाता है. आरोपी अपराध के समय नाबालिग नहीं था."

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इससे पहले हाई कोर्ट और चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया था कि इस बहुचर्चित गैंगरेप-हत्याकांड के आरोपी शुभम सांगरा को नाबालिग मानकर केस चलाया जाए. इस आदेश के खिलाफ जम्मू-कश्मीर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

क्या है पूरा केस?

10 जनवरी 2018 की घटना है. जम्मू के कठुआ स्थित रसाना गांव की रहने वाली आठ साल की एक बच्ची गायब हो जाती है. वो बकरवाल थी जो मुसलमान घुमंतु चरवाहों का समुदाय है. गायब होने के सात दिन बाद पास के जंगल में बच्ची का शव मिलता है. शव परीक्षण के बाद बताया गया कि बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया था. इसके बाद वारदात से जुड़ी जो-जो जानकारी सामने आई, उसने जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश को हिलाकर रख दिया.

क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि बच्ची को एक मंदिर में छिपाकर रखा गया था. वहां नशीली दवाएं देकर उसे बुरी तरह यातनाएं दी गईं. उसका गैंगरेप हुआ. फिर गला दबाकर और पत्थर मारकर हत्या कर दी गई. बाद में शव जंगल में फेंक दिया. क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के मुताबिक केवल बकरवाल समुदाय को डराकर इलाके से निकालने के लिए आठ साल की बच्ची से ऐसी दरिंदगी की गई.

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मामले का एक शर्मनाक पहलू ये भी रहा कि बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या करने के आरोपियों के समर्थन में जुलूस निकाला गया. उसमें बीजेपी के दो पूर्व मंत्री भी शामिल थे. बाद में उन्हें भारी विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा था. मगर न्यायालय ने मामले की तेजी से सुनवाई की. इसलिए घटना के डेढ़ साल बाद ही 10 जून, 2019 को गांव के सरपंच और तीन पुलिसकर्मियों समेत छह लोगों को बच्ची के बलात्कार और हत्या का दोषी करार दिया गया. तीन को उम्रकैद की सजा मिली. बाकी तीन दोषियों को पांच-पांच साल की कैद हुई. एक आरोपी पर केस साबित नहीं हुआ था. उसे बरी कर दिया गया.

इसके अलावा एक और आरोपी था जिसे मामले की शुरुआत में नाबालिग बताया गया था. लेकिन बाद में हुई जांच से साबित हुआ था कि घटना के समय वो बालिग था. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि शुभम सांगरा नाम के इस आरोपी पर भी बतौर एडल्ट केस चलाया जाए.

कठुआ की बलात्कार पीड़िता के पिता के साथ धोखा हुआ है

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