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कश्मीर में जिसे जीप से बांधा गया था, अब उसे 10 लाख रुपए मिलने वाले हैं!

जानिए 'जीप से बांधकर घुमाए गए पत्थरबाज' फारूक अहमद डार का सच.

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सेना की जीप पर बांधकर घुमाया जाता फारूक (बाएं) और अपनी मां के साथ हाथ में बैंडेज बांधे फारूक (दाएं)

जम्मू-कश्मीर के राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि सेना ने घाटी के जिस लड़के को जीप के बोनट पर बांधकर घुमाया था, उसे मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपए दिए जाएं. पर क्या आप जानते हैं कि वो लड़का है कौन, जिसे बोनट पर बांधकर घुमाया गया था. जानिए:

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अप्रैल में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें भारतीय सेना कश्मीर में एक स्थानीय युवक को जीप के बोनट पर बांधकर घुमा रही थी. दिखाया गया कि गाड़ी को पत्थरबाजों से बचाने के लिए सेना ने ऐसा किया. वीडियो में कहा जा रहा था, 'ऐसा हाल होगा, पत्थर चलाने वालों ये हाल होगा'. जीप पर बांधे गए इस शख्स की पहचान हो गई है. 26 साल के इस लड़के का नाम फारूक अहमद डार है, जो पेशे से दर्जी है. बडगाम में रहने वाला फारूक बताता है कि उसने जिंदगी में कभी सेना पर पत्थर नहीं फेंके.


Farooq-Ahmed फारूक अहमद

इस वीडियो के पहले 11 अप्रैल को घाटी का एक और वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें CRPF जवान जम्मू-कश्मीर में हुए उपचुनाव के बाद EVMs और पोलिंग पार्टी के साथ पैदल कहीं जा रहे थे और स्थानीय युवक उनके साथ मारपीट कर रहे थे. मशीनों को बचाने के लिए जवानों ने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया. इस वीडियो पर सेना के जवानों की खूब तारीफ हुई, लेकिन युवक को जीप से बांधने वाले वीडियो के बाद कश्मीर में सेना की बहस फिर वहीं आ गई, जहां से शुरू हुई थी.

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कश्मीर में CRFP जवान को पीटता एक स्थानीय युवक
कश्मीर में CRFP जवान को पीटता एक स्थानीय युवक

फारूक बडगाम के चिल गांव का रहने वाला है. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान उसने बताया, 'मैं पत्थरबाज नहीं हूं. मैंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी सेना पर पत्थर नहीं फेंके. मैं शॉल की कढ़ाई का काम करता हूं और थोड़ी-बहुत बढ़ईगिरी जानता हूं. मैं यही काम करता हूं.' फारूक ने बताया कि उसे 11 अप्रैल को सुबह 11 बजे से चार घंटे तक जीप से बांधकर घुमाया गया. तब से उसका बांया हाथ सूजा हुआ है और बैंडेज बंधा हुआ है.

सेना के हत्थे कैसे चढ़ा फारूख

फारूक ने बताया कि 11 अप्रैल को वह अपने घर से 17 किमी दूर गमपोरा जा रहा था. वहां उसके किसी रिश्तेदार का चौथा था, जिसकी उपचुनाव वाले दिन मौत हो गई थी. वह बाइक से अपने भाई और पड़ोसी के साथ जा रहा था. उटलीगाम में उन्होंने एक महिला को चुनाव के खिलाफ प्रदर्शन करते देखा और यहीं उससे गलती हो गई. उसके बाइक से उतरने से पहले ही जवान वहां पहुंच गए. वह बताता है,


'उन्होंने मुझे पीटा और फिर जीप से बांध दिया. उन्होंने मुझे नौ गांवों में घुमाया. एक महिला ने मुझे बचाने की कोशिश की थी, लेकिन तभी हवाई फायर की गई और वो सब भाग गए. रास्ते में सैनिक चिल्ला रहे थे, 'आओ, अपने ही आदमी पर पत्थर चलाओ आकर.' लोग दूर भाग रहे थे, वो डरे हुए थे. मुझे एक भी लफ्ज बोलने से मना किया गया था.'

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