सॉरी, मुझे नहीं पता था कोरोना की दवाई है.डीएसपी जितेंद्र खटकड़ के मुताबिक हो सकता है चोर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के चक्कर में कोरोना वैक्सीन चुरा ली हो. हालांकि अभी तक चोरों के बारे में कोई खास जानकारी पुलिस को नहीं मिली है. पुलिस ने इस बारे में अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 457 और 380 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.

चोरों ने वैक्सीन चुराने के लिए कुंडी काट डाली. पुलिस मान रही है कि चोर रेमडेसिवर चुराने आए थे लेकिन गलती से वैक्सीन ले गए. (फोटो-आजतक)
अब शायद ही काम आ सके ये वैक्सीन चोर भले ही मानवता दिखाते हुए वैक्सीन वापस कर गया हो लेकिन अब शायद ही इनका इस्तेमाल हो सके. कोरोना की वैक्सीन को एक निश्चित तापमान पर फ्रिज में रखा जाता है. ऐसा न करने पर यह खराब हो जाती है. जानकारी के मुताबिक लगभग 12 घंटे तक फ्रिज से बाहर रही कोरोना की ये वैक्सीन और डोज अब इस्तेमाल के लायक नहीं हैं. फिर भी इस बारे में सिविल सर्जन ने मुख्यालय से गाइडलाइन मांगी हैं. पैसा छोड़ वैक्सीन ले गए चोर ने एक और अजीबो-गरीब हरकत की. उसने अनजाने में ही सही वैक्सीन की चोरी की लेकिन अलमारी में रखे 50 हजार रुपए छोड़ गया. सिविल अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डा. बिमला राठी ने सिविल लाइन थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 22 अप्रैल की सुबह सफाई कर्मचारी सुरेश कुमार सफाई करने पहुंचे तो दरवाजे के कुंडे टूटे हुए थे और वैक्सीन स्टोर खुला हुआ था. हेल्थ इंस्पेक्टर राममेहर वर्मा, पीपी सेंटर की वैक्सीन इंचार्ज शीला देवी ने मौके पर आकर देखा स्टोर के फ्रिज के बाहर बीसीजी, पोलियो वैक्सीन, हेपेटाइटिस-बी की वैक्सीन पड़ी हुई थी और कोरोना वैक्सीन की 171 शीशी गायब थीं. इनमें कोविशील्ड की 1270 और कोवैक्सीन की 440 डोज थी. चोर दूसरे कमरे की अलमारी में रखी फाइल भी ले गए, जबकि उसी अलमारी में भंडारे के लिए रखी गई 50 हजार रुपये की नकदी छोड़ गए.
उस फाइल में आरटीआई और किसी कर्मचारी की पुराने जांच से संबंधित कागजात थे. घटना का पता चलते ही डीआईजी ओपी नरवाल ने घटनास्थल का जायजा लिया और चोरों को पकड़ने के लिए तीन टीमें गठित करके पूरे जिले की पुलिस को अलर्ट कर दिया. पुलिस की सख्ती देख 12 घंटे बाद ही चोर कोरोना डोज से भरा बैग सिविल लाइन के सामने चाय के खोखे पर रख गया.
पुलिस ने पीपी सेंटर के सामने अस्पताल के पुराने भवन में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला, जिसमें दो युवक बैग के साथ दिखाई दे रहे हैं. ये कैमरे से बचने के लिए पार्क की ग्रिल से कूदकर पीपी सेंटर में घुसे थे.
बता दें कि जब जनवरी में वैक्सीन की पहली डोज जिले में पहुंची थी, तो दस दिन तक वहां पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया. वैक्सीन का जिला भंडारण कक्ष होने के बावजूद वहां पर स्वास्थ्य विभाग ने ना तो सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं और न ही सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं.













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