जापान के हवाई क्षेत्र में रूस का एक सर्विलांस प्लेन तीन बार घुस आया. इसे लेकर जापान ने रूस से कड़ा एतराज जताया है (Russian military plane enters Japanese airspace). जापान के रक्षा मंत्री ने बताया कि सेना ने लड़ाकू विमानों को भेजकर और रेडियो तथा फ्लेयर चेतावनी जारी करके रूसी प्लेन को जवाब दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2019 के बाद ये पहली ऐसी घटना है.
रूसी सेना के विमान की घुसपैठ से बुरी तरह भड़का जापान, अपने लड़ाकू प्लेन भेजे और...
जापान के रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले महीने के अंत में नागासाकी प्रान्त के पास एक चीनी सैन्य जासूसी विमान ने घुसपैठ की थी. जापान ने इस कदम को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया था, और कहा था कि वो इस उड़ान को देश की सुरक्षा के लिए खतरा मानता है.


द जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 23 सितंबर को रूस का सर्विलांस प्लेन जापान के एयरस्पेस में तीन बार घुसा. इसे लेकर जापान के रक्षा मंत्री मिनोरू किहारा ने बताया,
“रूसी IL-38 पैट्रोल विमान ने सोमवार (21 दिसंबर) की दोपहर होक्काइडो के रेबुन द्वीप के पास जापानी हवाई क्षेत्र का तीन बार उल्लंघन किया. विमान ने 1 मिनट, 30 सेकंड और 1 मिनट की अवधि तक ये उल्लंघन किए.”
किहारा ने आगे बताया,
"हमारे हवाई क्षेत्र का ये उल्लंघन काफी चिंताजनक है. हमने राजनयिक माध्यमों से रूसी सरकार के समक्ष इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया है. साथ ही ये भी अनुरोध किया है कि वो आने वाले समय में ऐसा कुछ ना किया जाए."
किहारा ने कहा कि ASDF F-15 और F-35 लड़ाकू विमानों ने रेडियो पर चेतावनी जारी की थी. इसके अलावा फ्लेयर्स तैनात किए थे. किहारा ने कहा कि रूसी विमान के तीसरी बार एयरस्पेस में घुसने पर ऐसा किया गया था. उन्होेंने बताया कि ये एक ऐसा उपाय है जो देश अपने हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की स्थिति में कर सकता है.
उन्होंने बताया कि पिछले महीने के अंत में नागासाकी प्रान्त के पास एक चीनी सैन्य जासूसी विमान ने घुसपैठ की थी. जापान ने इस कदम को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया था, और कहा था कि वो इस उड़ान को देश की सुरक्षा के लिए खतरा मानता है.
फ्लेयर्स को हीट-सीकिंग मिसाइलों को भ्रमित करने के लिए फायर किया जाता है. लेकिन आमतौर पर ये विमानों को चेतावनी देने के लिए फायर किए जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक किहारा ने एयरस्पेस उल्लंघन के बारे में अन्य कोई और जानकारी नहीं साझा की. हालांकि, उन्होंने कहा कि ये संभव है कि ये एयरस्पेस उल्लंघन चीन के साथ चल रहे रूस के संयुक्त सैन्य अभ्यास से संबंधित हो.
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