विजय शेखर शर्मा को कुछ वेबसाइट्स ने अभद्र बोलते हुए एक बुरा व्यक्ति भी बताया है. हालांकि मुझे वीडियो को ध्यान से देखने पर कुछ भी उत्तेजक या अभद्र नहीं लगता. इस वीडियो को 'ऑफिस चाय' नाम के एक ग्रुप ने अपलोड किया था. 15 की उम्र में स्कूल छोड़ कॉलेज शुरू करने वाले विजय 37 की उम्र में करोड़ों की कंपनी के मालिक हैं. ये आश्चर्य की तो बात नहीं है कि वो अपनी जीत का जश्न मनाते हुए जरा बहक गए. लगभग 15 सालों तक माइक्रोसॉफ्ट के CEO रहे स्टीव बाल्मर भी इसी तरह स्टेज पर चीखते, नाचते गाते थे. अपनी कंपनी में काम करने वालों में उत्साह भरते हुए उनके कई स्टेज वीडियो इसी तरह वायरल हुए हैं. https://www.youtube.com/watch?v=I14b-C67EXY
क्या ये वीडियो सचमुच पेटीएम के मालिक पर सवाल खड़े करता है?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो से लोग खफ़ा हैं.
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फोटो - thelallantop
अगर नोटबंदी देश के लिए 'वर्ड ऑफ़ द इयर' था, तो दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा चर्चित शब्द शायद 'पेटीएम' रहा होगा. दुकानदारों, चायवालों से लेकर सब्जी वालों तक, हर जगह लोग पेटीएम से पैसे लेने लगे. कई लोगों ने ये आरोप लगाए कि कैशलेस होने का सबसे ज्यादा भला तो पेटीएम को हुआ है. अरविंद केजरीवाल ने ये सवाल भी उठाया कि फैसला मोदी का है, पूरी देश में कैश की कमी है और पेटीएम का भला हो रहा है. 'प्रधानमंत्री जी, डील क्या है? इधर नोटबंदी का फैसला आया और उधर पेटीएम के इश्तेहारों से हमारे दिन-रात लद गए. सुबह उठकर अखबारों में दिखा, टीवी पर दिखा. रेस्टोरेंट को खाने मंगाने के लिए फ़ोन किया, तो जवाब आया परेशान न हों, पेटीएम से पैसे दे दें. IRCTC ने कहा पेटीएम से टिकट बुक करो, कैब वालों ने बोला पेटीएम से पेमेंट करोगे तो 25 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा. कुल मिलकर मोदी अगर अर्थव्यवस्था को 'कैशलेस' करने के लिए 2 कदम चले, तो तीसरे कदम से पेटीएम उनके साथ हो लिया. जिस ई-वॉलेट में रोज हजारों करोड़ रूपये जमा होने लगे, वो रातों-रात दिन दूनी रात चौगुनी कमाई करने लगा, ये कहना अतिशयोक्ति न होगा कि पेटीएम के CEO विजय शेखर शर्मा 37 की उम्र में देश के सबसे अमीर और मशहूर व्यवसाइयों में से एक हो गए. अकेले दिसंबर 2016 में पेटीएम के 8 करोड़ एक्टिव यूजर थे. विजय शेखर शर्मा का एक सक्सेस पार्टी में रिकॉर्ड हुआ वीडियो ख़बरों में आ रहा है. जिसमें वो अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को बुरा भला कह रहे हैं. किसी का नाम लेकर नहीं, बस जोश में: हमने कुछ सोचा
और साला दूसरों की पैंट गीली नहीं हुई
तो क्या सोचा?
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