अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को हुए सीजफायर समझौते में एक अहम शर्त शामिल थी- ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही. लेकिन समझौते के बाद भी इस अहम समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही धीमी बनी हुई है. अब अमेरिकी अधिकारियों ने इसके पीछे की वजह बताई है.
ईरान होर्मुज खोल भी देगा तो धमाके नहीं रोक पाएगा? अमेरिका को 'लापता माइंस' का डर
Iran-US Ceasefire के बाद भी ‘Strait of Hormuz’ से जहाजों की आवाजाही धीमी बनी हुई है. जहाजों के आने-जाने पर धीमी चाल क्यों बनी हुई है? अब अमेरिकी अधिकारियों ने इसके पीछे की वजह बताई है.


ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह से इसलिए नहीं खोल पा रहा है, क्योंकि उसके सामने एक बुनियादी समस्या है. वह उन बारूदी सुरंगों (नेवल माइंस) का पता नहीं लगा पा रहा है, जिन्हें उसने पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद बिछाया था. ईरान के पास उन्हें हटाने की तकनीकी क्षमता भी नहीं है. अमेरिकी अधिकारियों ने अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को यह जानकारी दी.
पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद करके इसे सबसे बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया. तेहरान ने छोटी नावों का इस्तेमाल करके होर्मुज में माइंस बिछानी शुरू कर दीं. जहाज की आवाजाही बंद हुई तो दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं और ईरान को युद्ध में बड़ा फायदा हुआ.
रिपोर्ट में बताया गया कि ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, 2 मार्च को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के एक सीनियर अधिकारी ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बंद करने का ऐलान किया और चेतावनी दी कि जहाज समुद्री माइन से टकरा सकते हैं. हालांकि, ईरान ने होर्मुज से गुजरने के लिए एक रास्ता खुला रखा, जिससे टोल चुकाने वाले जहाजों को वहां से गुजरने की इजाजत मिल गई.
लेकिन अब यही रणनीति ईरान को नुकसान पहुंचा रही है. अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि माइंस बिखरे हुए और बेतरतीब तरीके से बिछाई गई थीं. यह भी अभी साफ नहीं है कि तेहरान ने उनकी लोकेशन पूरी तरह से रिकॉर्ड की थी या नहीं. NYT के मुताबिक, अगर रिकॉर्ड रखा भी गया था, तो भी हो सकता है कि कुछ माइंस अपनी जगह से खिसक गई हों, जिससे उन्हें वापस निकालना और भी मुश्किल हो गया हो.
माइन हटाना, उन्हें बिछाने से कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हो रहा है. यहां तक कि अमेरिकी सेना भी अपने एडवांस्ड सिस्टम के साथ माइन हटाने के लिए खास लिटोरल कॉम्बैट शिप पर निर्भर है और उसके पास ज्यादा क्षमताएं नहीं हैं.
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8 अप्रैल को एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के ‘पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खुलने’ पर निर्भर करेगा. इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज को ‘टेक्निकल कमियों पर ध्यान देने के साथ’ फिर से खोला जाएगा. अमेरिकी अधिकारियों ने NYT को बताया कि यह बात माइन की समस्या को मानने का सबूत है.
अराघची के नेतृत्व में 70 सदस्यों वाला एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल आज यानी 11 अप्रैल को पाकिस्तान में शांति वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मिलने वाला है. इस बैठक में होर्मुज खोलने समेत परमानेंट एग्रीमेंट पर बातचीत होगी.
वीडियो: मोजतबा खामेनेई ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए नया प्लान बनाया?




















