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ईरान के लिए निकल गए थे फाइटर जेट, फिर आए तीन फोन और ट्रंप ने ले लिया फैसला

Iran-America Ceasefire: डॉनल्ड ट्रंप की तय की हुई डेडलाइन खत्म होने वाली थी. वो डेडलाइन, जिसके बाद डॉनल्ड ट्रंप एक पूरी सभ्यता को ख़त्म करने वाले थे. हमले की तैयारी पूरी थी. उधर ईरान ह्यूमन चेन बना रहा था. तभी ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान कर दिया. सीजफायर होने से 90 पहले क्या-क्या हुआ?

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ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते के पीछे की कहानी. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • डॉनल्ड ट्रंप ने 7 अप्रैल को अमेरिकी समयानुसार शाम 6:32 बजे ट्रुथ सोशल पर दो हफ्तों के सीजफायर की घोषणा की, जिसे ईरान और इजरायल ने स्वीकार किया।
  • डेडलाइन खत्म होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ था, और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दो हफ्ते के सीजफायर का सुझाव दिया था।
  • सीजफायर लागू होने के बाद तेल की कीमतें गिर गईं और शेयर बाजार में तेजी आई, साथ ही 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की बातचीत नियोजित है।

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में सीजफायर के बाद लोग ईरान की सड़कों पर जश्न मनाते दिखे. लोगों के हाथ में झंडे थे और चेहरे पर मुस्कान. सीजफायर दो हफ़्तों के लिए लागू किया गया है. लेक‍िन इस सीजफायर से पहले ट्रंप ने जो डेडलाइन दी थी, उसके आखिरी 90 मिनट में क्या-क्या हुआ? ये जानते हैं. 

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7 अप्रैल की शाम. समय करीब 6 बजकर 30 मिनट. वॉशिंगटन में घड़ी की सुईयां तेजी से आगे बढ़ रही थीं, क्योंकि ठीक 90 मिनट बाद, यानी रात 8:00 बजे अमेरिकी टाइम के मुताबिक, डॉनल्ड ट्रंप की तय की हुई डेडलाइन खत्म होने वाली थी. वो डेडलाइन, जिसके बाद डॉनल्ड ट्रंप एक पूरी सभ्यता को ख़त्म करने वाले थे. हमले की तैयारी पूरी थी. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान के लिए उड़ान भर चुके थे, टारगेट तय थे, पुल, पावर प्लांट, पानी प्लांट. तेहरान के पास एक बड़े पुल को पहले ही निशाना बनाया जा चुका था. दुनिया भर में बेचैनी थी. हर कोई घड़ी देख रहा था.

लेकिन दोपहर में एक अमेरिकी अधिकारी ने फॉक्स न्यूज़ से कहा, ‘हम बात कर रहे हैं, अगर किस्मत अच्छी रही, तो आज कुछ पॉज़िटिव हो सकता है.’

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उधर ईरान में एक अलग हलचल थी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी पिछले 48 सालों से ऐसी बातों से ईरानियों को डराने की कोशिश करते आ रहे हैं. ईरान के डिप्टी मिनिस्टर ऑफ यूथ एंड स्पोर्ट्स ने युवाओं से अपील की कि वे देश के पावर प्लांट्स के बाहर ह्यूमन चेन बनाएं. छात्र, मजदूर, आम लोग, सब हाथों में हाथ डालकर खड़े हो गए. डर भी था, लेकिन एक तरह का जज्बा भी.

इस बीच जंग रुकी नहीं थी. इजरायल रेल लाइन और पुलों पर हमले कर रहा था. हर तरफ से एक ही तस्वीर नज़र आ रही थी. लग रहा था कि हालात बहुत बड़ी तबाही की तरफ बढ़ रहे हैं. क्योंकि एक तरफ अमेरिका लगातार धमकियां दे रहा था. और दूसरी तरफ ईरान था जो पीछे हटने को तैयार नहीं था. 

इस बीच पाकिस्तान में अलग कहानी भुन रही थी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ लगातार फोन पर लगे थे. उन्होंने 7 अप्रैल की दोपहर दो हफ्ते के सीजफायर का सुझाव भी X पर शेयर किया. उन्होंने कहा कि ट्रंप अपनी डेडलाइन दो हफ्ते के लिए बढ़ा दें और ईरान भी उसी समय के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ खोल दे, ताकि इसे एक पॉजिटिव कदम के तौर पर देखा जा सके. 

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू, सऊदी अरब और यूएई के नेता, और बाकियों ने ट्रंप से फोन करके कहा कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव न मानें, जिसमें ज्यादा से ज्यादा फायदा न मिल रहा हो. लेकिन अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ जैसे लोग कह रहे थे, ‘अगर डील हो रही है तो उसे लेना चाहिए’. फिर शाम 6 बजकर 32 मिनट पर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया और सीजफायर का ऐलान कर दिया. ईरान और इजरायल ने भी इसकी पुष्टि कर दी.  

सीजफायर के बाद तेल की कीमतें गिर गईं, शेयर बाजार ऊपर चढ़ गया. ये सब ऐसे था जैसे दुनिया ने एक साथ राहत की सांस ली हो. अमेरिकी समय के हिसाब से रात 8 बजे सीजफायर लागू हुआ. अगर सब कुछ ठीक रहा तो ईरान और अमेरिका की मुलाक़ात 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होगी. इसे इस्लामाबाद टॉक्स कहा जा रहा है.

वीडियो: अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों तक हमले रुके, ट्रंप ने क्या कहा?

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