ईरान ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उसके डेलिगेशन के दो सदस्यों को न्यूयॉर्क छोड़ने की बात कही गई थी. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में शामिल होने ईरान का डेलिगेशन भी पहुंचा था. इस बीच ईरानी डेलिगेशन के दो सदस्य न्यूयॉर्क में ही ठहरे थे. जहां उन्हें दोनों देशों के बीच चल रही जंग को बातचीत के जरिए सुलझाना था.
ईरानी डिप्लोमेट्स को अमेरिका ने देश से निकाला या वो खुद वापस लौटे? नया विवाद शुरू
Iran US War: ईरान ने अमेरिका से अपने दो राजनयिकों को निकाले जाने की बात का खंडन किया है. ईरानी मिशन ने कहा कि दोनों राजनयिकों ने प्लान के तहत ही ऐसा किया है.

AXIOS की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने इस बात का खंडन कर दिया है. मिशन ने कहा कि डेलिगेशन के वापस जाने का प्लान पहले से ही तय था. इसलिए वे उसी के तहत अमेरिका से ईरान के लिए रवाना हुए. साथ ही यह भी बताया कि अमेरिकी विदेश विभाग को इस प्लान की जानकारी थी क्योंकि उन्हें इसके बारे में 17 सितंबर को ही बता दिया गया था. ईरानी मिशन ने कहा,
‘कुछ हासिल न कर पाने की वजह से अमेरिकी विदेश विभाग बेबुनियाद खबरें फैला रहा है.’
रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरानी डेलिगेशन के 2 मेंबर्स को शनिवार, 3 अक्टूबर को देश से बाहर निकाल दिया गया था. क्योंकि, उन्हें कुछ दिन पहले ही देश छोड़ने के लिए कहा गया था. अमेरिकी अधिकारी ने कहा,
ईरानी राजनयिकों ने अमेरिका की बात नहीं सुनी‘सेक्रेटरी रुबियो अपनी बात पर पक्के हैं. UN जनरल असेंबली खत्म होने के बाद भी ईरानी डेलिगेशन के दो सदस्य न्यूयॉर्क में ही थे. अब उन्हें देश से बाहर निकाल दिया गया है.’
अधिकारी ने यह भी बताया कि दोनों ईरानी राजनयिकों ने स्टेट की उस मांग को भी नहीं माना, जो ईरानी मिशन से कही गई थी. इस मांग में पूरे ईरानी डेलिगेशन को फौरन देश छोड़ना था. अधिकारी के मुताबिक, ईरानी मिशन को यह भी बताया गया था कि अमेरिका को यह पता है कि दोनों राजनयिक अब भी न्यूयॉर्क में हैं. इस बार फिर से ईरान से कहा गया कि उनके दोनों मेंबर्स को तुरंत देश छोड़ना होगा. बाद में एक मेंबर शुक्रवार, 2 अक्टूबर और दूसरा शनिवार, 3 अक्टूबर को देश छोड़कर चला गया.
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दोनों देशों के बीच ऐसी खींचतान लंबे समय से चल रही है. दोनों ही देश इस जंग को खत्म करने की कोशिश में लगे हैं. ईरान-अमेरिका बातचीत की टेबल पर बैठते तो हैं, लेकिन एक-दूसरे की मांगों को मान नहीं पाते.
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