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मध्य प्रदेश में 8 आतंकियों के एनकाउंटर पर आई जांच रिपोर्ट क्यों सवालों में घिरी?

रिपोर्ट में बहुत सी जरूरी बातों का जवाब नहीं दिया गया है.

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भोपाल जेल से भागे आठ आतंकियो का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया था.
30 अक्टूबर, 2016 की रात को भोपाल सेंट्रल जेल से प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी के आठ आतंकी जेल से भागे थे. भागने से पहले इन्होंने एक पुलिसकर्मी की हत्या की थी और दूसरे को बंधक बनाया था. अगले ही दिन इन आठों आतंकियों को एनकाउंटर में मार दिया गया. इस एनकाउंटर के वीडियोज भी सामने आए थे. एनकाउंटर पर सवाल भी उठे. न्यायिक जांच की मांग की गई. मध्य प्रदेश सरकार इसके लिए तैयार हो गई. हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एस के पांडे को इसकी न्यायिक जांच के आदेश दिए गए. अब इसकी रिपोर्ट आ गई है. 25 जून को 17 पन्नों की इस जांच रिपोर्ट को मध्य प्रदेश विधानसभा में रखा गया. इसमें एनकाउंटर को सही करार दिया गया है.
रिपोर्ट में क्या है
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि आठों आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी को बंधक बनाया और दूसरे की हत्या कर दी. कपड़ों और वहां पड़ी लकड़ियों से उन्होंने सीढ़ी बनाई, जिससे वो जेल की दीवार पार कर गए. कुछ दूरी पर ईंटखेड़ी गांव की पहाड़ी पर कुछ गांव वालों ने इन आतंकियों को देख पुलिस को सूचना दी.
पुलिस जैसे ही पहाड़ी पर पहुंची, आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. आतंकियों के पास खंजर जैसे हथियार भी थे. पुलिस ने आतंकियों से सरेंडर करने को कहा. नहीं मानने पर पुलिस ने भी फायरिंग की और सभी आतंकी मारे गए. हालांकि आतंकियों के पास हथियार कैसे आए इसका जिक्र रिपोर्ट में नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने अपने बचाव में एनकाउंटर किया, जो सही था. इस घटना के चश्मदीद गवाह भी सामने आए, जिन्होंने जांच में बयान दर्ज करवाए.
MP विधानसभा में पेश की गई जांच रिपोर्ट.
MP विधानसभा में पेश की गई जांच रिपोर्ट.

जेलों की होगी फेंसिंग
जांच रिपोर्ट के मुताबिक जेल की दीवार की ऊंचाई कम थी. इस वजह से आतंकी दीवार को आसानी से पार कर गए. इसलिए रिपोर्ट में जेलों की दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने का भी सुझाव दिया गया है. सरकार ने इस सुझाव को मानते हुए 11 सेंट्रल जेलों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग के लिए 3 करोड़ 90 लाख रुपए जारी कर दिए हैं. सीएम शिवराज ने एनकाउंटर पर सवाल उठाने वालों की निंदा की. कहा कि आतंकी मानवता के दुश्मन थे. ऐसे लोगों पर जल्द से जल्द ट्रायल चला सजा देनी चाहिए. यह एनकाउंटर एकदम जायज था. इस पर सवाल उठाना गलत है.
लेकिन कुछ सवाल अभी बाकी हैं-
इस जांच रिपोर्ट में कई जरूरी सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं.
1. ये आठों आतंकी अलग-अलग सेल में बंद थे. ऐसे में बिना किसी मिलीभगत के कैसे यह पूरी प्लानिंग की?
2. आतंकी एक हाई सिक्योरिटी जेल से भागे थे. इतनी सुरक्षा के बावजूद किसी को उनके भागने की जानकारी तुरंत क्यों नहीं लगी? भोपाल जेल को देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से माना जाता है. ऐसे में इतनी आसानी से आतंकी कैसे भाग गए?
3. भागने के बाद उनके पास हथियार कहां से आए? पुलिस का कहना है कि आतंकियों ने फायरिंग की, पर जब गांव वालों ने इन आतंकियों को देखा तो इनके पास लाठी-डंडे थे. (जैसा एक चश्मदीद ने उस समय इंटरव्यू में कहा था)
4. एनकाउंटर के बाद जो वीडियोज आए थे उनमें कुछ पुलिसवाले लाशों पर भी गोली चला रहे थे. जब एनकाउंटर में आतंकी मारे जा चुके थे तो लाशों पर क्यों गोली चलाई जा रहीं थीं.
5. एक वीडियो में एक आतंकी जिंदा दिखाई दे रहा था. उसको बाद में गोली मारी गई. क्या उस आतंकवादी को बचाया नहींं जाना चाहिए था ताकि पूरी साजिश का खुलासा हो सके?
ये कुछ सवाल हैं जिनके जवाब इस जांच रिपोर्ट में नहीं हैं. लेकिन फिर भी इस एनकाउंटर में सबको क्लीनचिट दे दी गई है.
वीडियो जिसमें जिंदा आतंकी को गोली मारी जा रही है-



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