एक करोड़ की आबादी वाले मुल्क क्यूबा की कई पहचान हैं. सफेद रेत वाले बीच, शुगर क्यूब की मिठास, दुनिया के सबसे अच्छे सिगार और साल्सा. लेकिन ये सारी पहचानें आज की तारीख में एक आदमी, 'फिदेल कास्त्रो' के नाम में जज़्ब हो जाती हैं.
वो नहीं रहा. क्यूबा क्रांति का सेनापति फिदेल कास्त्रो नहीं रहा!
'क्यूबा-कास्त्रो-क्म्युनिस्ट.' ये तीन शब्दो का मामूली सेट नहीं है, वैश्विक इतिहास में अमेरिकी पूंजीवाद के खिलाफ एक कल्ट है. एक ऐसा आइकन जिसका रिफ्लेक्शन दिल्ली से मिडिल ईस्ट तक के मुल्कों की लेफ्ट विंग राजनीति मे दिखता हैं. जिसका स्वैग जाने-अनजाने बड़े-बड़े मॉल से लेकर सड़क किनारे बिकने वाली चेग्वेरा की टी-शर्ट्स तक में दिख जाता है.

कास्त्रो और चे
दुनिया के तीसरे सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले शासक कास्त्रो की ज़िंदगी किसी दिलचस्प फ़िल्म से कम नहीं रही है. ये मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट क्रांतिकारी 1959 से 1976 तक क्यूबा का प्रधानमंत्री रहा और 1976 से 2008 तक राष्ट्रपति रहा. जानते हैं 90 साल की उम्र में दुनिया से रुखसत होने वाले इस शख़्स के कुछ दिलचस्प पहलू.
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'क्रांति कम्यूनिज़्म नहीं'
कास्त्रो वामपंथ के बड़े प्रतीकों में से एक हैं. अमेरिकी पूंजीवाद के खिलाफ उनकी लड़ाई दुनिया जानती है. उनका कहना था कि अमेरिका में भी एक दिन 'क्लासलेस सोसायटी' आएगी. कास्त्रो ही थे, जिन्होंने ये भी कहा कि
"न मैं कम्युनिस्ट हूं. न ही क्रांतिकारी मूवमेंट कम्यूनिज़्म है"
अर्थव्यवस्था पर उनकी राय थी,
"एक अच्छी अर्थव्यवस्था में कम्युनिज़्म और मार्क्सवाद की नहीं लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की ज़रूरत होती है."
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गाय कनेक्शन
जवाहर लाल नेहरू पहले बड़े नेता थे जिन्होने कास्त्रो का अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर साथ दिया. बदले में कास्त्रो भी भारत के साथ अपने रिश्ते को खूब मानते थे. अब ये तो नहीं पता कि फिदेल को हिंदुस्तानियों की गाय के प्रति आस्था का पता था या नहीं मगर उनकी गाय 'ऊबर ब्लांका' के नाम एक दिन में 110 लीटर दूध देने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है.
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'अगर उसे मार नहीं सकते तो उसकी दाढ़ी नोंच लो'
फिदेल कास्त्रो को मारने की 638 कोशिशें नाकाम हुईं और इनमें से ज़्यादातर के पीछे अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA थी. विस्फोटक घोंघे, ज़हरीले और बारूद वाले सिगार और ऐसे तमाम अजीबो-गरीब तरीके आजमाए गए. सब नाकम रहे तो CIA ने जाने क्या सोचकर फिदेल के ऊपर एक ऐसे पाउडर का इस्तेमाल करने की कोशिश की, जिससे उनकी दाढ़ी झड़ सकती थी. एजेंसी का मानना था कि जनता क्लीन शेव कास्त्रो को अपना नेता मानने से इन्कार कर देगी.
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कोई और ऐसे भाषण नहीं दे सकता
फिदेल कास्त्रो के नाम दुनिया के सबसे लम्बे भाषण देने का रिकॉर्ड है. 29 सितम्बर 1960 को संयुक्त राष्ट्र की सभा में दिया गया 4 घंटे 29 मिनट का भाषण UN के इतिहास की सबसे लम्बी स्पीच है. कास्त्रो की सबसे लम्बी स्पीच 1986 में हवाना में दी गई 7 घंटे 10 मिनट की है.
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निजी जीवन पर खूब बातें उड़ीं
'फिदेल' शब्द का अर्थ होता है वफादार. लेकिन बहुत सारे लोग मानते हैं कि कास्त्रो निजी जीवन में इसके ठीक उलट थे. उनके बच्चों की संख्या पर अलग-अलग दावे होते रहे हैं. उनके 3 महिलाओं से कम से कम 8 बच्चे हैं. 1992 में कास्त्रो की पूर्व प्रेमिका क्वीन मारिटा लॉरेंज़ ने 1959 में फिदेल के बच्चे को जन्म देने का खुलासा किया था. वैसे मारिटा को CIA ने फिदेल की हत्या के लिए भेजा था.
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दोस्तों के दोस्त
फिदेल के जीवन के कई पहलुओं पर लोगों की अलग राय हो सकती है मगर एक बात उनके बारे में निर्विवाद है. वह दोस्ती निभाने वाले लोगों में थे. नेहरू के साथ हुई मित्रता को फिदेल कास्त्रो ने ताउम्र निभाया. ये फिदेल ही थे जो भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को नेहरू की बेटी मानकर उन्हें सार्वजनिक मंच पर गले लगाने की हिम्मत कर सकते थे. चे ग्वेरा और फिदेल की दोस्ती जितनी प्रसिद्ध है उतनी ही गहरी फिदेल और मार्खेज़ की दोस्ती भी है. नोबेल विजेता नॉवेलिस्ट गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ को फिदेल की दोस्ती के चलते 30 सालों तक अमेरिका में प्रवेश नहीं दिया गया.

कास्त्रो और मार्खेज़
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