1964 से 1979 के बीच में भारतीय क्रिकेट टीम में रहे चंद्रशेखर ने अपने पोलियो वाले हाथों से बॉलिंग की. दाहिने हाथ में पोलियो होने के बावजूद चन्द्रशेखर अपनी मारक गेंदबाज़ी के तरीके के लिए जाने जाते थे. उनके इसी नायाब तरीके के लिए उन्हें न सिर्फ साथी खिलाड़ियों की भरपूर तारीफ मिली बल्कि चंद्रशेखर ने भारत को क्रिकेट के मैदान पर कई जीत भी दिलाईं.
चंद्रशेखर की बात इसलिए क्योंकि जिस बेंगलुरू से चंद्रशेखर आते हैं, वहीं पर एक और करिश्माई बॉलर है. नाम है शंकर सज्जन. 18 साल का ये लड़का दायें हाथ से स्पिन फेंकता है और अफगानिस्तान की टीम को नेट्स में गेंदबाजी कर रहा है. हैरानी की बात ये कि शंकर के दोनों हाथ असामान्य हैं. मगर गेंद पर पकड़ इतनी जबरदस्त है कि वो न सिर्फ गेंद को स्पिन करता है बल्कि फील्डिंग भी करता है. रोजाना 6-8 घंटे क्रिकेट खेलता है. गजब की लेग स्पिन फेंकता है शंकर.

बी चंद्रशेखर ने 58 टेस्ट खेले और 242 विकेट लिए. शंकर भी बड़े लेवल पर क्रिकेट खेलने की चाहत रखता है.
बेंगलुरू के नेट्स में वो अफगानिस्तान के राशिद खान से बॉलिंग के गुर सीखता भी दिखता है. लेग स्पिन करवाता है. जब बेंगलुरू आया तो हफ्ता भर ग्राउंड पर ही सोया. 21 में से 3 चुने गए. कर्नाटक के बीजापुर में रहने वाला शंकर क्रिकेट की इतना दीवाना है कि 10वीं क्लास पास करने के बाद वो बेंगलुरू आ गया और यहां अनिल कुंबले ने जब इसकी गेंदबाजी देखी तो अपनी अकेडमी में एडमिशन दे दी. शंकर एक इंटरव्यू में बताता है कि उसने अकेडमी के स्पिन स्टार कॉन्टेस्ट में भाग लिया था जिसमें 21 लोगों मे से 3 को चुना गया और उनमें शंकर भी एक था. तब से यहां न सिर्फ शंकर बॉलिंग सीखता है बल्कि रहने और खाने का इंतजाम भी यहीं पर है. अफगानिस्तान टीम ने जब शंकर को नेट्स पर स्पिन फेंकते देखा तो टीम का एक एक खिलाड़ी इस अनोखे बॉलर से जाके मिला. कई खिलाड़ियों ने शंकर के साथ तस्वीरें भी क्लिक कीं.
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