सर...क्या आप भारत से हैं? हमने अख़बारों में पढ़ा है कि हिंदू अपने इर्द-गिर्द मुसलमानों को नहीं देखना चाहते हैं. इसीलिए हम थोड़े परेशान थे.ये पंक्ति एक विदेशी ने कही. एक हिंदुस्तानी से, जो कि छुट्टियां मनाने भारत से बाहर गया था. ये पूरी बातचीत पढ़कर आप कैसा महसूस करेंगे, हमें नहीं मालूम. मगर हम तो शर्म से कट गए जैसे. शर्मिंदगी से सिर गड़ गया हमारा.
किशोर मारीवाला. ये एक कारोबारी हैं. इनकी कंपनी है- Marico. जिसके चेयरमैन हैं इनके भतीजे हर्ष मारीवाला. Marico भारत की अगड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनी है. पैराशूट तेल, सफोला, हेयर ऐंड केयर, लिवॉन ये सब इसी कंपनी के ब्रैंड हैं. बचपन में जूं होने पर जो मेडिकर शैंपू लगाते थे न, वो भी इनकी ही कंपनी का है. किशोर मारीवाला को समंदर और जहाजों से बड़ी मुहब्बत है. वो ख़ुद भी एक नाविक हैं. तो हुआ ये कि किशोर समंदर में थोड़ा समय गुज़ारना चाहते थे. इसीलिए वो पहुंचे थाइलैंड. वहां उन्होंने किराये पर एक हफ़्ते के लिए यॉट बुक कराई. यॉट के साथ एक कैप्टन को भी होना था. 4 जनवरी को जब किशोर थाइलैंड पहुंचे, तो यॉट की बुकिंग से जुड़ा काम फाइनल करने वो पहुंचे उस चार्टिंग कंपनी के दफ़्तर. वहां ऑफिस में एक रिसेप्शनिस्ट ने उनसे ज़रूरी कागज़ात लिए. बाकी सारी जानकारियां दर्ज़ कीं और फिर सवाल किया-
रिसेप्शनिस्ट- सर, आप भारत से आए हैं. क्या आप हिंदू हैं? किशोर- हां, मगर आप ये क्यों पूछ रही हैं?इसके बाद रिसेप्शनिस्ट अपने मैनेजर को बुलाकर लाई. मैनेजर और रिसेप्शनिस्ट, दोनों थाई भाषा में कुछ बातें करने लगे. इसके बाद मैनेजर ने किशोर से कहा-
मैनेजर- सर, हमारे सारे स्किपर (यॉट का कैप्टन) बाकी यॉट के साथ गए हुए हैं. बस एक ही स्किपर अभी मौजूद है, लेकिन वो मुस्लिम है. उम्मीद करता हूं कि आपको ये बुरा नहीं लगेगा.5 जनवरी को किशोर मारीवाला ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में ये बात लिखी.
किशोर- आप मुझसे ये सवाल क्यों कर रहे हैं? मुझे क्यों बुरा लगेगा?
मैनेजर- सर, हमने अख़बारों में पढ़ा है कि हिंदू अपने इर्द-गिर्द मुसलमानों को नहीं देखना चाहते हैं. इसीलिए हम इस बात को लेकर परेशान थे.
उन्होंने लिखा है-
मैं बता नहीं सकता कि उस मैनेजर की बात सुनकर मुझे कितनी शर्मिंदगी महसूस हुई. मैंने उसे समझाया कि न केवल मैं, बल्कि ज़्यादातर सभ्य हिंदू उस तरीके का बर्ताव नहीं करते जिसके बारे में उन्होंने अख़बारों में पढ़ा है.किशोर आगे लिखते हैं-
क्या विदेश में हमारी यही छवि रह गई है? क्या बाहर के आम लोग हमारे बारे में यही सोचते हैं? मैं बहुत शर्मिंदा हूं. मैं बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रहा हूं.

किशोर मारीवाला ने थाइलैंड की अपनी ये आपबीती 5 जनवरी को फेसबुक पर बताई. ये ख़बर लिखे जाने तक ढाई हज़ार से ज़्यादा लोग उनकी ये पोस्ट शेयर कर चुके हैं.
इस ख़बर में आगे कुछ नहीं बच जाता है बताने को. लेकिन इससे आगे सोचने-समझने को बहुत कुछ है. लोग कहते हैं, उन्हें इस देश से मुहब्बत है. जो कोई अपने वतन से सच में प्यार करे, तो हमवतनों से नफ़रत कैसे करेगा? हो सकता है आप कहें कि विदेशी मीडिया पक्षपाती है. सोचें कि भारत के बहुसंख्यकों के बारे में बाहर झूठी बातें फैलाई जा रही हैं. लेकिन फिर अपने आसपास देखिए. क्या आपको सच में नफ़रत नहीं दिखती लोगों में. क्या धार्मिक असहिष्णुता नज़र नहीं आती? एक अजीब सा आक्रामक और ज़हरीला माहौल नहीं दिखता आस-पास?
फोर्ब्स की 'Billionaires 2019' लिस्ट में 1,227 नंबर पर था किशोर मारीवाला का नाम. फोर्ब्स पर किशोर की प्रोफाइल देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए.
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