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बांग्लादेश में भारतीय संपत्ति को खतरा, मोहम्मद यूनुस से मिले भारतीय उच्चायुक्त, क्या बातें हुईं?

Bangladesh की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार Muhammad Yunus और भारतीय उच्चायुक्त की मुलाकात में सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा हुई है.

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22 अगस्त को गेस्टहाउस जमुना में ये बैठक हुई. (तस्वीर: सोशल मीडिया)

बांग्लादेश (Bangladesh) में भारतीय राजदूत प्रणय वर्मा ने वहां की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) से मुलाकात की है. वर्मा ने बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग और अन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की है. स्थानीय अखबार डेली स्टार ने इस मामले को रिपोर्ट किया है. 22 अगस्त को गेस्ट हाउस जमुना में ये बैठक हुई. 

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मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने विदेश सेवा अकादमी में एक प्रेस वार्ता में इस मुलाकात की जानकारी दी. शफीकुल ने कहा कि अंतरिम सरकार ने पहले ही पूरे राजनयिक क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ा दी है. भारतीय उच्चायोग ने इस संबंध में सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट किया है,

"उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस से परिचयात्मक मुलाकात की. शांति, सुरक्षा और विकास के लिए बांग्लादेश के साथ काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई गई."

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बांग्लादेश की प्राइवेट न्यूज एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (UNB) के अनुसार, सुरक्षा मामलों के साथ-साथ भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों के बीच साझा समृद्धि के लक्ष्य पर भी चर्चा की. 

ये भी पढ़ें: "भारत ने पानी छोड़ कर बाढ़ ला दी", बांग्लादेश के गंभीर आरोप पर सरकार का जवाब आया है

बांग्लादेश में भारत का सबसे बड़ा वीजा संचालन केंद्र है और पिछले साल करीब 16 लाख लोग भारत आए थे. न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उनमें से 60 प्रतिशत पर्यटन उद्देश्यों के लिए, 30 प्रतिशत चिकित्सा उद्देश्यों के लिए और 10 प्रतिशत अन्य उद्देश्यों के लिए आए थे. 

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बाढ़ के मामले पर बांग्लादेश ने कहा कि जल स्तर बढ़ने के कारण पानी “स्वतः ही छोड़ दिया गया”. उच्चायुक्त ने कहा कि त्रिपुरा में आई बाढ़ के कारण 50,000 लोग विस्थापित हुए हैं. उन्होंने कहा कि इससे बांग्लादेश और भारत दोनों तरफ तबाही हुई है. यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश एक बड़ा परिवार है. और उन्होंने जल के मुद्दों पर उच्च स्तरीय सहयोग और आपातकालीन स्थितियों में इसे सक्रिय करने पर जोर दिया.

इससे पहले, सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था. 5 अगस्त को हसीना भारत आ गईं. इसके बाद वहां अंतरिम सरकार का गठन हुआ.

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