भारतीय क्रिकेट टीम रांची में हुए वन-डे मैच में आर्मी कैप पहन कर मैदान में उतरी थी. टीम ने पुलवामा हमले में शहीद जवानों के सम्मान में ऐसा किया था. खिलाड़ियों ने इस मैच की फीस शहीद परिवारों को डोनेट करने का निर्णय लिया था. यह एक तरीका था शहीद परिवारों को आर्थिक तौर पर मदद करने का. भारतीय टीम के इस कदम से सबसे ज्यादा तकलीफ पाकिस्तान को हुई. पाकिस्तान ने आईसीसी से कहा कि भारतीय टीम ने आर्मी कैप पहनकर मैच का राजनीतिकरण कर दिया. आईसीसी को इस मसले पर एक्शन लेना चाहिए. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख एहसान मनि ने कराची में कहा था कि भारतीय टीम ने किसी और ऑब्जेक्टिव से आईसीसी से आर्मी कैप पहनने की इजाजत ली थी और इसका इस्तेमाल किसी और ऑब्जेक्टिव के लिए किया गया. जो एक्सेप्टेबल नहीं है. पाकिस्तान के इंफोर्मेंशन एंड ब्रॉडकास्ट मिनिस्टर फवाद चौधरी ने कहा था कि, "अगर इंडियन टीम को रोका नहीं गया तो पाकिस्तान टीम भी किसी इंटरनैशनल मैच में बाजुओं पर काली पट्टी बांध कर उतरेगी और इंडिया के कश्मीरी लोगों पर अत्याचार को दुनिया के सामने लाएगी. पीसीबी इंडिया के खिलाफ दुनिया के दूसरे देशों को शिकायत भी दे.” इस पूरे मसले पर अब आईसीसी ने जवाब दे दिया है. आईसीसी ने कहा है कि टीम इंडिया को मैच के दौरान आर्मी कैप पहनने की इजाजत दी गई थी. आईसीसी के प्रवक्ता क्लेरी फुर्लोग ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया-
बीसीसीआई ने पैसे जुटाने और शहीद सैनिकों की याद में कैप पहनने की अनुमति मांगी थी और टीम इंडिया को इसकी इजाज़त दी गई थी.
आईसीसी ने इंटरनैशनल मैचों के दौरान अपनी पॉलिटिकल सेंटीमेंट्स को दिखाने के लिए खिलाड़ियों पर प्रतिबंध भी लगाए हैं. इंग्लैंड क्रिकेट के ऑलराउंडर मोइन अली पर भारत के खिलाफ टेस्ट मैच खेलते हुए "सेव गाजा" और "फ्री फिलिस्तीन" के नारे वाले बैंड कलाई पर पहनने को लेकर आईसीसी ने 5 साल साल का बैन लगा दिया गया था.
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