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डायपर पर खून ने अरिहा को मां से दूर कर दिया, 2 साल की बच्ची को लेकर भारत ने अब जर्मनी से क्या कहा?

बच्ची तब सात महीने की थी, जब जर्मनी वालों ने उसे उसकी मां से छीनकर अलग कर दिया था, इसकी वजह क्या थी?

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अरिहा को जर्मनी में दो साल पूरे होने को आए हैं (फोटो- इंडिया टुडे)

भारतीय बच्ची अरिहा (Ariha) को जर्मनी (Germany) में दो साल पूरे होने को आए हैं, लेकिन उसके भारत लौटने की कोई खबर नहीं है. अब इस मामले पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए जर्मनी के राजदूत को तलब किया है. बच्ची को भारत में उसके परिवार के पास वापस लौटाने को लेकर दबाव डाला गया है. माता-पिता भावेश और धारा शाह बच्ची की कस्टडी वापस पाने के इंतजार में हैं.

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने जानकारी देते हुए बताया है कि इस हफ्ते की शुरुआत में जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन को अरिहा के मुद्दे पर तलब किया गया था. बागची ने बताया कि उन्होंने इस मामले को उच्च प्राथमिकता दी है. उनका मानना है कि बच्ची को जर्मन पालक देखभाल में रखे जाने से उसके सांस्कृतिक अधिकारों और एक भारतीय के रूप में उसके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है.

इससे पहले पिछले साल दिसंबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने जर्मन समकक्ष एनालेना बेयरबॉक से अरिहा को लेकर चिंताओं के बारे में बताया था.

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कैसे अलग हुई बच्ची?

सितंबर 2021 में अरिहा के पिता वर्क वीजा पर जर्मनी के बर्लिन में बतौर इंजीनियर काम कर रहे थे. साथ में परिवार भी था. तब बच्ची सात महीने की थी. जर्मन अधिकारियों ने बच्ची के डायपर पर खून मिलने के बाद उसे कस्टडी में ले लिया था. जर्मन प्रशासन ने अरिहा के माता-पिता पर बच्ची के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. मामले पर अरिहा के माता-पिता का कहना है कि एक मामूली दुर्घटना में बच्ची को चोट लग गई थी.

तब से ही अरिहा जर्मनी के एक फॉस्टर होम में हैं. फॉस्टर होम वो जगह है, जहां बच्चों की देखभाल की जाती है. ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता या तो इस दुनिया में नहीं हैं या फिर बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ हैं.

अरिहा की मां धारा का कहना है,

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अगस्त के अंत में अरिहा को फॉस्टर केयर में दो साल पूरे हो जाएंगे. वहां के नियम के मुताबिक, अगर कोई बच्चा दो साल तक फॉस्टर केयर में रहता है तो बच्चे को माता-पिता को वापस नहीं किया जा सकता है. क्योंकि वो नई स्थितियों और कल्चरल शॉक का सामना करने में असमर्थ होगा.

अरिहा के माता-पिता ने बच्ची के साथ फॉस्टर होम में रहने की परमिशन भी मांगी थी, लेकिन जर्मन अधिकारियों ने उसके लिए भी मना कर दिया.

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