The Lallantop

मिशन शक्ति को लेकर अमेरिका ने फिर वही दोहरापन दिखा दिया, जिसके लिए वो कुख्यात है

सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें 72 छेद.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश को बताया कि भारत ने अंतरिक्ष में बड़ी कामयाबी हासिल की है. इसका नाम ‘मिशन शक्ति’ रखा गया. उन्होंने कहा कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में महाशक्ति बन गया है. अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया है. पीएम ने बताया कि हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर LEO यानी लो अर्थ ऑर्बिट में एक लाइव सैटलाइट को मार गिराया. यह लाइव सैटलाइट पूर्व निर्धारित लक्ष्य था, जिसे एंटी सैटलाइट से मार गिराया गया.

# क्या था ऑपरेशन -

पीएम ने कहा कि सिर्फ तीन मिनट में यह ऑपरेशन पूर कर लिया गया. मिशन शक्ति बहुत कठिन ऑपरेशन था. जिसमें बहुत उच्च कोटि की तकनीकी क्षमता की जरूरत थी. पीएम ने कहा कि वैज्ञानिकों ने सभी निर्धारित लक्ष्य और उद्देश्य प्राप्त कर लिए. इस मिशन को जिस एंटी सैटलाइट से अंजाम दिया गया, उसे भारत में ही विकसित किया गया है. पीएम ने मिशन की सफलता के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और उससे जुड़े लोगों का धन्यवाद दिया.

# पाकिस्तान ने क्या कहा -

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है – अंतरिक्ष एक कॉमन हेरिटेज है. दुनिया के हर देश की जिम्मेदारी है कि अंतरिक्ष में होने वाले सैन्यकरण को रोके. हमें उम्मीद है कि जिन देशों ने अतीत में इस तरह के प्रदर्शन की कड़ी निंदा की है. वे सैन्य खतरों को रोकने के लिए इस बार भी कदम उठाएंगे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि ऐसे परीक्षण को देखे.

# चीन ने क्या कहा -

चीन की ओर से भी बयान आया है. चीन का कहना है कि उसे उम्मीद है कि आउटर स्पेस में शांति स्थापित करने के लिए सारे देश कदम उठाएंगे. चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने लिखित बयान में कहा है – भारत की ओर से अंतरिक्ष में सैटलाइट मार गिराने की रिपोर्ट मिली है. हम उम्मीद करते हैं कि दुनिया के हर देश अंतरिक्ष में शांति स्थापित करने के लिए कदम उठाएंगे. चीन ने 2007 में ही एंटी सैटलाइट मिसाइल से अंतरिक्ष में एक सैटलाइट को मार गिराया था.

# अमेरिका ने क्या कहा -

चलिए चीन और पाक ने क्या बोले और क्यों बोले ये समझ में आता है लेकिन अमेरिका के बारे में तो वो कहावत सच साबित हुई - सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें 72 छेद. ऐसा क्यों कह रहे हैं हम? वो इसलिए क्यूंकि मिशन शक्ति को लेकर अमेरिका ने कहा है कि हमारे लिए अंतरिक्ष में मलबा एक बड़ी समस्या है. अब बताइए सबसे पहले ए-सेट का परीक्षण करके बैठ चुका, सबसे ज़्यादा स्पेस-मलबा फ़ैलाने वाले देशों में शामिल, और कार्बन फुटप्रिंट्स बढ़ाने में कुछ सबसे ज़्यादा सहयोग करने वाले देशों में शामिल होने वाले के लिए आप यही तो कहेंगे न? ये दोहरापन इसका कोई ने थोड़ी न है. अतीत में इसने वो सब किया जसके लिए बाकियों को धमकाया. फिर चाहे वो न्यूक्लियर प्रोलीफिरेशन हो या पर्यावरण प्रदूषण. वैसे पत्रकारों को जवाब देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ये भी कहा है कि हम स्पेस में भारत के साथ अपना गठजोड़ ज़ारी रखेंगे. ...तो ये सब पढ़कर कहा जा सकता है कि बयान बिटर-स्वीट है!

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement