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हेल्थ मिनिस्टर ने ऑक्सीजन कोटे की बात की तो ट्विटर पर कुछ लोग क्यों भड़क गए?

दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत से मरीजों की जान जा रही है.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दिल्ली को कोटे के हिसाब से ऑक्सीजन दे दी गई. इस बयान पर सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं. (फाइल फोटो- PTI)
दिल्ली में ऑक्सीजन (oxygen) की भारी किल्लत है. ऑक्सीजन की कमी से अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के मौत की खबरें आ रही हैं. इस मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी गंभीर टिप्पणी की थी. कहा था कि उन अफसरों को फांसी पर चढ़ा देंगे जो ऑक्सीजन की सप्लाई में बाधा डाल रहे हैं. सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) तमाम मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख गुहार लगा रहे हैं. वे राज्यों से अपील कर रहे हैं कि दिल्ली को ऑक्सीजन सप्लाई करें. केंद्र को शुक्रिया अदा करने के साथ ऑक्सीजन की बढ़ती डिमांड को पूरा करने की बात भी लगातार कह रहे हैं. इस बीच ऑक्सीजन को लेकर देश के हेल्थ मिनिस्टर हर्ष वर्धन के एक बयान पर बवाल हो रहा है. दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर (second wave of corona) में ऑक्सीजन की बढ़ती डिमांड को देखते हुए लोग अपनी नाराजगी जता रहे हैं. असल में बवाल हेल्थ मिनिस्टर के उस बयान पर है जिसमें वह दिल्ली के लिए ऑक्सीजन के कोटे की बात कर रहे हैं. दिल्ली को कोटे के मुताबिक मिली ऑक्सीनजन को लेकर हेल्थ मिनिस्टर ने कहा, 
दिल्ली को कोटे से ज्यादा ऑक्सीजन दी गई है. खुद सीएम केजरीवाल ने भी पीएम को शुक्रिया बोला था. राज्य में सही तरह से ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था भी कर दी गई है.
डॉक्टर हर्ष वर्धन शनिवार, 24 अप्रैल को सरदार पटेल कोविड केयर सेंटर की तैयारियों को देखने पहुंचे. यह अगले हफ्ते मरीजों के लिए तैयार हो जाएगा. इस मौके पर उन्होंने कहा कि हर राज्य को अपने कोटे के हिसाब से ही ऑक्सीजन दी गई है और अब उसे सही तरह से मैनेज करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. लोग बोले - क्या सांस लेना छोड़ दें डॉक्टर हर्ष वर्धन के ट्वीट को लेकर ट्विटर पर कुछ लोग काफी आहत नजर आए. विरल खिमेसरा ने लिखा
गुजरात को 95000 एक्टिव केसेज पर 975 मीट्रिक टन और दिल्ली के इतने ही केसेज पर 480 मीट्रिक टन. बाकी दिल्ली के पेशेंट क्या सांस रोक लें?
कमल नारायण ओमेर ने लिखा
अगर दिल्ली की कोटे से ज़्यादा ऑक्सिजन मिल रही है तो फिर सारे अस्पतालों में ऑक्सिजन क्यों नहीं है. या तो कोटे में कमी है या फिर पहुंचने के प्रयत्नों में. बहरहाल क्या जाने बचाने का कोई कोटा भी होना चाहिए ये समझ में नहीं आता. कुछ भी हो, बस नियत में कमी नहीं होनी चाहिए.
मोहन नाम के यूजर ने ऑक्सीजन की डिमांड सप्लाई का कथित डॉक्युमेंट पोस्ट करते हुए लिखा.
क्या वाकई में सर?
सानया ने ट्वीट किया
कोटा का मतलब क्या होता है. क्या ये दाल-चावल-चीनी है जिसे लोगों में राशन कार्ड का कलर देख कर दिया जा रहा है?
  एक दिन पहले ही 24 अप्रैल को ऑक्सीजन की किल्लत पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने  केंद्र से पूछा था कि दिल्ली को आवंटित प्रतिदिन 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन कब मिलेगा? कोर्ट ने कहा था,
आप (केंद्र) ने हमें 21 अप्रैल को आश्वासन दिया था कि 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्रतिदिन दिल्ली पहुंचेगा. हमें बताएं कि यह दिन कब आएगा? हम एक निश्चित तारीख चाहते हैं. जब दिल्ली को उसके कोटे का 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिलेगा. कोई भी आपके इरादों पर संदेह नहीं कर रहा है, लेकिन तथ्य यह है कि 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दिल्ली नहीं पहुंचा है. हम लोगों को इस तरह मरने के लिए नहीं छोड़ सकते.
बता दें कि दिल्ली में कुल 10 लाख से ज्यादा कोरोना के केसेज आ चुके हैं. शनिवार तक 24 घंटे में 24103 केसेज का और इजाफा हुआ है. दिल्ली में 93 हजार से भी ज्यादा कोरोना के एक्टिव केसेज हैं.

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