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बाज़ार में धड़ल्ले से बिक रही नकली रेमडेसिविर की पहचान ऐसे करें

नकली दवा बेचने वाले चार लोगों को किया गिरफ्तार.

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बज़ार में नकली रेमेडेसिविर धड़ल्ले से बिक रही है. काला बाज़ारी करने वालों को पुलिस ने पकड़ लिया है. नकली और असली रेमेडेसिविर की पहचान के लिए आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना पड़ेगा.
कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित मरीजों को इलाज के दौरान दिए जाने वाली रेमडेसिविर (Remdesivir) की मांग इस समय सबसे ज़्यादा है. मुनाफाखोर इसके लिए मुंह मांगे दाम ले रहे हैं. ऐसा भी देखने में आ रहा है कि लोग इसके नाम पर ठगी का व्यापार भी चला रहे हैं. किसी को नकली रेमडेसिविर थमाकर चूना लगाया जा रहा है, तो किसी को पैसे लेकर भी कुछ नहीं दिया जा रहा है. हर जगह इस दवा की कमी को लेकर हंगामा मचा है. इसी बीच दिल्ली पुलिस ने चार ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जो बाज़ार में धड़ल्ले से नकली रेमडेसिविर बेच रहे थे.
बाज़ार में रेमडेसिविर की कमी और इसकी सप्लाई में शॉर्टेज का फायदा उठाकर ये लोग इसकी काला बाज़ारी कर रहे थे. सिर्फ दिल्ली में ही नहीं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी पुलिस ने नकली रेमडेसिविर बेचने वालों को गिरफ्तार किया है.
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने  नकली रेमडेसिविर लेकर एक ट्वीट किया. उन्होंने नकली रेमडेसिविर की फोटो पोस्ट करते हुए बताया कि असली और नकली की पहचान कैसे करें. हम आपको डीसीपी द्वारा  बताए वो 9 स्टेप बताएंगे, जिससे आप नकली और असली रेमडेसिविर में पहचान आसानी से कर सकते हैं. ऐसे पहचानें नकली रेमडेसिविर 1. नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर ऊपर की तरफ ''Rx'' नहीं लिखा होता है. जबकि असली डिब्बे पर आपको इंजेक्शन के नाम के आगे ये लिखा हुआ दिखाई देगा.
2. नकली रेमडेसिविर के डिब्बे पर आपको दवा के नाम में फोंट (शब्दों की बनावट) कुछ अलग सा दिखेगा. नकली पैकेट की तीसरी लाइन पर “100 mg/vial” लिखा हुआ होता है. जबकि असली डिब्बे पर “100 mg/Vial” लिखा होगा. इसमें आपको कैपिटल और स्मॉल लेटर का फर्क समझ आ जाएगा.
3. जिस जगह कोवीफोर (COVIFOR) लिखा गया है उसके अलाइनमेंट में भी गड़बड़ी देखने को मिलती है. ओरिजनल वाले पैकेट पर बिना गैप दिए इसे लिखा गया है. जबकि नकली पैक पर इसके और ऊपर लिखे टेक्स्ट के बीच थोड़ा सा गैप छोड़ा गया होगा.
4. COVIFOR के ठीक नीचे लिखी इंस्ट्रक्शन (निर्देशों) में भी आपको फर्क दिखाई देगा. असली पैक पर इसके नीचे सिर्फ दो लाइने लिखी गई है. जबकि नकली पैकेट पर लिखे टेक्स्ट का फॉन्ट साइज़ बहुत छोटा है और इसमें भी कैपिटल और स्मॉल लेटर्स का एरर दिखाई देता है.
5. असली रेमडेसिविर इंजेक्शन के पैकेट पर सबसे नीचे की तरफ “For use in” कैपिटल लेटर में लिखा गया है. जबकि नकली रेमडेसिविर के डिब्बे पर इसे फिर स्मॉल लेटर्स में लिखा गया है. जिससे आप इसके असली और नकली होने के फर्क को पहचान सकते हैं.
रेमेडेसिविर का ये डिब्बा नकली है. जिसे आप कुछ चीज़ों का ध्यान देकर पहचान सकते हैं.
रेमडेसिविर का ये डिब्बा नकली है. जिसे आप कुछ चीज़ों की तरफ ध्यान देकर आसानी से पहचान सकते हैं.

6. अब आते हैं बॉक्स के पीछे वाले हिस्से पर. असली वाली दवा में बॉक्स के पीछे लाल रंग से “Warning” लेबल को दिखाया गया है. जबकि नकली वाले में ये गायब दिखता है. अगर किसी में मिला भी, तो वो काले रंग से लिखा हुआ दिखाई देता है.
7. इसी के ठीक नीचे “Covifir is manufactured under the licence from Gilead Sciences, Inc” लिखा जाता है. जो नकली वाले डिब्बे पर नहीं दिखाई देगा. इसलिए इसे खरीदने से पहले ज़रूर ध्यान में रखें.
8. नकली रेमडेसिविर बनाने वालों की ये सबसे बड़ी गलती कही जा सकती है. असली दवा के डिब्बे के नीचे लिखे इंडिया (India) का आई कैपिटल लेटर से लिखा हुआ मिलता है. जबकि नकली डिब्बे में ये स्मॉल आई से शुरू होता है.
9. डीसीपी मोनिका भारद्वाज द्वारा शेयर की हुई इस तस्वीर में एक गलती और मिलती है कि इसमें राज्य का नाम Telangana (तेलंगाना) को “Telagana” लिखा गया है. जिसे देखकर भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इंजेक्शन का ये डिब्बा नकली है. प्रदेश सरकार क्या कर रही है रेमडेसिविर के नकली इंजेक्शन पर रोक लगाने और इसकी काला बाज़ार को रोकने के लिए राज्य सरकारों ने अपनी तरफ से भी पहल की है. उत्तर प्रदेश और बिहार में रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के ज़रिए ही की जा रही है. और अगर किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में इसकी ज़रूरत होती है तो उसे जिला प्रशासन से मांगना पड़ेगा.
चंडीगढ़ में रेमडेसिविर इंजेक्शन गिनी-चुनी कैमिस्ट शॉप पर ही उपलब्ध है. मगर इसे खरीदने के लिए खरीददार के पास सरकारी डॉक्टर या अस्पताल का पर्चा चाहिए. कोविड पॉज़िटिव रिपोर्ट या मरीज़ के आधार कार्ड पर भी ये इंजेक्शन उपलब्ध करवाया जा रहा है. वहीं राजस्थान में इस इंजेक्शन की सप्लाई का जिम्मा जिला प्रशासन को दिया गया है. हरियाणा पुलिस ने जारी कर दिए हेल्पलाइन नंबर रेमडेसिविर की काला बाज़ारी को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया है. कस्टमर यहां कॉल करके रेमडेसिविर की नकली बिक्री करने वाले के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं. हरियाणा पुलिस के मुताबिक, 7087089947 और टोल-फ्री नंबर 1800-180-1314 पर कॉल करके आप शिकायत कर सकते हैं.

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