हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है- ग़ालिब
नॉट सो ट्रस्टेबल सूत्रों के मुताबिक, एक्टर अनुपम खेर नेता बनने की ओर हैं. हर बात पर अंदाज़-ए-गुफ़्तगू छेड़ देते हैं. खैर, खेर शुक्रवार को दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी पहुंचे. फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की आजादी का यूज भी कर डाले. मंच पर खड़े होकर बोले:
'इन स्टूडेंट्स को क्या हुआ है. देश विरोधी नारे लगाने वाले हमारी हीरो नहीं हो सकते. स्टूडेंट्स यहां पढ़ने आते हैं, न कि राजनीति करने. जो लोग जमानत पर बाहर हैं, उनका यहां स्वागत नहीं होना चाहिए था. मैं चाहता हूं कि फोकस क्रांति से वापस देशभक्ति पर शिफ्ट हो जाए.'
अनुपम खेर ने सवाल किया, 'भुखमरी से आजादी नारे लगाने वालों ने भुखमरी खत्म करने के लिए क्या किया. कश्मीरी हिंदुओं के लिए नारे लगाने की जगह आपने क्या किया.' अनुपम खेर ने ये शेर भी पढ़ा.
'उमर भर अपने गिरेबां से उलझने वाले
तू मुझे मेरे ही साए से डराता क्या है'