RSS के शिविर में क्या बोले प्रणब दा, आइए जानते हैं कुछ बातें:

मंच से बोलते प्रणब दा.
#मैं यहां भारत, राष्ट्रवाद और देशभक्ति के बारे में चर्चा करने यहां आया हूं.
#ये तीनों अपने आप में अलग चीजें हैं. इन तीनों पर एक साथ चर्चा कठिन है.
#हजारों साल पहले भारत में मेगस्थनीज, फाह्यान और ह्वेनसांग जैसे विदेशी आए. सबने भारत के प्रशासन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की.
#हजारों साल पहले भी भारत में नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षा संस्थान रहे हैं.
#भारत यूरोपियन स्टेट के कंसेप्ट से पहले भी एक स्टेट है. हम सर्वे भवन्तु सुखिन: और वसुधैव कुटुम्बकम को मानते आए हैं.
#जैसे सर्वपल्ली राधाकृष्णनन ने कहा था कि हमारे बीच कोई भी विचारधारात्मक अंतर हो हम एक ही देश के बाशिंदे रहेंगे. हमारे अंदर बहुत सारे अंतर हैं.
#अगर हम भारत के इतिहास को देखें तो हम महाजनपद देखते हैं. जिनमें चंद्रगुप्त मौर्या, अशोक जैसे राजा थे. चंद्रगुप्त के बाद भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गया.
#इसके कुछ सैकड़ों साल बाद भारत पर मुस्लिमों का राज रहा. फिर अंग्रेजों का राज हो गया.
#ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक पावर सेंटर बनाया, जो गवर्नर जनरल था. 1857 की क्रांति के बाद भारत पर रानी का शासन लागू हो गया.
#इतने सालों के अलग-अलग राज के बाद भी हमारी 5,000 सालों पुरानी संस्कृति जिंदा रही.
#(उन्होंने बंगाली में कहा जिसका मतलब था कि) भारत ऐसे बना है जैसे अलग-अलग नदियां मिलकर समुद्र बनाती हैं.
#कांग्रेस के सुरेंद्रनाथ घोष ने राष्ट्रवाद का कॉन्सेप्ट दिया जिसमें सभी भारतीय शामिल थे. फिर बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज का नारा दिया.
#फिर गांधीजी और नेहरू जी ने राष्ट्रवाद पर चर्चा की. नेहरू ने कहा कि राष्ट्रवाद जाति, धर्म से ऊपर उठकर देश के प्रति जिम्मेदारी है.
#हमें 1947 में आजादी मिली. सरदार पटेल ने सब रियासतों को मिलाकर एक देश बनाया. 1950 में भारत में संविधान लागू हुआ. जिससे पूरे देश के सभी लोगों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार दिया.
#हमें आजादी के टाइम 1900 साल के विदेशी राज के बाद एक देश मिला. जिसमें एक लोकतंत्र कायम हुआ.
#कुछ सच्चाई हैं, जो मैंने पिछले 50 सालों में जानी हैं.
#भारत विविधताओं का देश है. जो हमें खास बनाती हैं. यहां बहुत सारे धर्म, जातियां और भाषाएं हैं. फिर भी यहां बस एक संविधान, एक झंडा और सबकी एक ही पहचान है वो है भारतीय.
#राष्ट्रवाद सब जाति-धर्मों से ऊपर है.
#हमारे अंदर विचारों की भिन्नता है. हम इसे खारिज नहीं कर सकते. इसके लिए आपस में संवाद बहुत जरूरी है.
# देश में डर-भय का माहौल बन रहा है लेकिन हमें सहनशीलता सीखनी चाहिए. संविधान के रास्ते ही शांति के रास्ते पर चलना चाहिए.
#अगर किसी बच्चे या महिला पर अत्याचार होता है तो वो भारत की आत्मा पर एक हमला है. हमें गुस्से और हिंसा को छोड़कर शांति की ओर आगे बढ़ना चाहिए.
#आप सब जवान हैं, पढ़े-लिखे हैं आपको देश में सौहार्द बनाने के लिए काम करना चाहिए.
#भारत सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है. लेकिन फिर भी हम वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में बहुत नीचे हैं.
#चाणक्य का एक कथन है कि जनता की खुशी में ही राजा की खुशी है.
#हम सबको मिलकर बीमारियों, गरीबी और दूसरी समस्याओं से लड़ना होगा. जिससे हम एक अच्छा देश बना सकें.
इससे पहले मोहन भागवत ने कहा कि इस कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के आने पर विवाद की आवश्यकता नहीं है. हमने प्रणब दा को निमंत्रण दिया और उन्होंने दिल से स्वीकार किया.
उनके पहुंचने पर संघ का एंथम, जिसे संघ प्रार्थना कहा जाता है, भी गाया गया. प्रणब ने संघ के लोगों की तरह 'संघ नमस्कार' नहीं किया.
प्रणब मुखर्जी 6 जून को ही नागपुर पहुंच गए थे. आज शिविर समाप्ति पर उन्होंने भाषण दिया. इससे पहले उन्होंने केशव बलराम हेडगेवार की जन्मस्थली के दर्शन किया. जहां मोहन भागवत ने उनका स्वागत किया. वहां रखी विजिटर बुक में उन्होंने हेडगेवार को भारत मां का महान सपूत बताया.
साथ ही प्रणब मुखर्जी को टैग करते हुए लिखा, शायद आज की घटना से आपको समझ आ गया होगा कि भाजपा कैसे डर्टी ट्रिक्स चलती है. RSS को भी पता है कि आप अपने भाषण में उनके नजरिए का समर्थन नहीं करेंगे. लेकिन आपका भाषण भुला दिया जाएगा, बस तस्वीरें रह जाएंगी और वो गलत बयानों के साथ फैलाई जाएंगी. नागपुर जाने से आप बीजेपी-आरएसएस को झूठी कहानियां और अफवाहें फैलाने की अनुमति दे रहे हैं. यह तो अभी बस शुरुआत है.
ये भी पढ़ेें-
प्रणब मुखर्जी को RSS के न्योते के बाद VHP ने जिसे बुलाया वो और चौंकाने वाला है
मोदी जी नेपाल गए हैं, इस बार धर्म लेकर
राष्ट्रपति से मिले इनाम के पैसों से कैदियों को छुड़वा रहा है 14 साल का आयुष
बन सकते थे प्रधानमंत्री, और बन गए राष्ट्रपति
वीडियो- प्रणब मुखर्जी की पूरी कहानी
























