हाथरस भगदड़ मामले में यूपी सरकार ने छह अफसरों को सस्पेंड कर दिया है. ये एक्शन विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट आने के बाद लिया गया है. सस्पेंड होने वाले अफसरों में स्थानीय एसडीएम, सीओ और तहसीलदार समेत छह अधिकारी शामिल हैं. इससे पहले SIT ने 300 पन्नों की अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी. इसमें भगदड़ के लिए आयोजन कमेटी की लापरवाही को जिम्मेदार बताया गया था. साथ ही प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे. हालांकि इस रिपोर्ट में सूरजपाल उर्फ साकार विश्व हरि उर्फ 'भोले बाबा' का जिक्र तक नहीं था.
हाथरस हादसे पर पहला एक्शन, SDM समेत 6 अफसर सस्पेंड, SIT ने ऐसा क्या बता दिया?
Hathras stampede: हाथरस हादसे के 7 दिन बाद UP सरकार ने पहला बड़ा एक्शन लिया है. SDM, CO, इंस्पेक्टर समेत 6 अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है. सरकार ने SIT की रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की है.


इंडिया टुडे से जुड़े कुमार अभिषेक की एक रिपोर्ट के मुताबिक SIT ने अपनी रिपोर्ट में 119 लोगों के बयान दर्ज किए थे. इनमें हाथरस के डीएम आशीष कुमार, एसपी निपुण अग्रवाल से लेकर सत्संग की अनुमति देने वाले एसडीएम और सीओ सिकंदराराऊ के बयान शामिल थे. इनके अलावा घटना वाले दिन मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के बयान भी लिए गए थे.
SIT ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सत्संग आयोजित करने वाली कमेटी ने अनुमति से ज्यादा लोग बुलाए. जिसके लिए उनके पास पर्याप्त इंतजाम नहीं थे. SIT ने हादसे के लिए कार्यक्रम आयोजकों को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना. इसके अलावा SIT ने प्रशासन पर भी सवाल उठाए हैं. उसके मुताबिक पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के बावजूद कार्यक्रम की अनुमति दी गई. और मौके पर अफसरों ने मुआयना तक नहीं किया जिसके कारण ये हादसा हुआ. कमेटी ने हादसे के पीछे किसी बड़ी साजिश से भी इनकार नहीं किया और कहा कि मामले की गहन जांच की जरूरत है.
SIT ने कार्यक्रम आयोजक और तहसील स्तरीय पुलिस-प्रशासन को भी दोषी पाया. कहा कि स्थानीय एसडीएम, सीओ, तहसीलदार, इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज ने अपने दायित्व का निर्वहन करने में लापरवाही की. साथ ही कहा कि उप जिला मजिस्ट्रेट सिकन्दराराऊ द्वारा बिना कार्यक्रम स्थल का मुआयना किए आयोजन की इजाजत दे दी गई और उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत भी नहीं कराया. इंडिया टुडे के मुताबिक SIT ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. इसके बाद ही सिकन्दराराऊ के एसडीएम, सीओ, SHO, तहसीलदार और चौकी इंचार्ज कचौरा एवं चौकी इंचार्ज पोरा को सरकार ने सस्पेंड कर दिया.
बता दें कि हाथरस में 2 जुलाई को नारायण साकार हरि उर्फ 'भोले बाब' के एक कार्यक्रम के दौरान भगदड़ मच गई थी. इस हादसे में 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. भगदड़ की इस घटना का मुख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर को बनाया गया. पुलिस के मुताबिक देवप्रकाश मधुकर ही हाथरस में हुए कार्यक्रम का मुख्य आयोजक था और उसने इसके लिए चंदा जुटाया था. बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में 80 हजार लोगों के शामिल होने की परमिशन ली गई थी, जबकि 2.50 लाख से अधिक लोग जुटे थे.
यूपी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक SIT का गठन किया. एसआईटी में आगरा जोन की अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) अनुपम कुलश्रेष्ठ और अलीगढ़ मंडल आयुक्त शामिल थे.
यूपी सरकार ने इस घटना की SIT जांच के अलावा एक न्यायिक आयोग का भी गठन किया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज बृजेश कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यों के दल में पूर्व IAS अधिकारी हेमंत राव और पूर्व IPS अधिकारी भावेश कुमार शामिल हैं. न्यायिक आयोग को दो महीने के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी है.
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