'जब परिवार ही खत्म हो गया तो इस पैसे का अब हम क्या करेंगे!'. गुजरात के मोरबी में केबल पुल टूटने की घटना में मारे गए लोगों के परिजनों की ये पीड़ा और बेबसी है. प्रशासन ने उन्हें मुआवजा राशि दे दी है, लेकिन यह उनके प्रियजनों के खोने की तकलीफ को किसी भी तरह से कम करने में कारगर होता नहीं दिख रहा है.
'पैसे का क्या करेंगे जब परिवार ही खत्म हो गया', मोरबी हादसे के पीड़ितों ने बयान की बेबसी
प्रशासन ने मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये और घायल को 50 हजार रुपये देने का ऐलान किया था.


ऐसे ही एक पीड़ित शख्स 60 वर्षीय हेमंतभाई परमार ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,
'अब इस पैसे का मैं क्या ही करूंगा जब मेरा परिवार ही खत्म हो गया है?'
रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में परमार के घर के चार लोगों की मौत हुई, जिसमें उनके सबसे छोटे बेटे गौतमभाई (27), बहू चंद्रिकाबेन और उनके दो पोते शामिल हैं, जिनकी उम्र 9 और 5 वर्ष है. घटना के बाद जिला प्रशासन ने नाना खिजड़िया गांव स्थित उनके घर जाकर 16 लाख रुपये का चेक पकड़ा दिया, लेकिन इससे हेमंतभाई परमार की पीड़ा में कोई कमी न आ सकी.
इसी तरह असिफभाई मकवाना (35) और प्रभुभाई घोघा (55) नाम के दो पड़ोसियों के यहां मुआवजा राशि दी गई है. मकवाना के परिवार के तीन लोगों की मौत इस हादसे में हो गई. इनमें उनका 7 साल का बेटा भी शामिल था. वहीं घोघा की 19 साल की बेटी प्रियंका की मौत हुई है.
प्रभुभाई के बेटे विक्रम ने अखबार से कहा,
'मेरी बहन प्रियंका नन्हे अरशद को बहुत प्यार करती थी. जब उनके शवों को बरामद किया गया था, तो प्रियंका ने अरशद की उंगली को पकड़ रखा था. मेरी मां भी उन लोगों के साथ गई थी, सौभाग्य से वह बच गईं.'
मकवाना और घोटा परिवारों में पिछले तीन दशकों से पारिवारिक रिश्ता है. दोनों परिवार ने कहा कि वे प्रशासन और ओरेवा कंपनी से जवाब चाहते हैं कि पुल की मरम्मत क्यों ठीक से नहीं कराई गई थी.
इस हादसे में बेटे अरशद के अलावा अपनी पत्नी शाहबानो (29) और मां मुमताजबेन (62) को गंवाने वाले आसिफ भाई ने कहा,
'जब पुल का प्रबंधन मोरबी नगरपालिका द्वारा किया जा रहा था, तब पुल पर 50 लोगों को जाने की अनुमति होती थी और प्रवेश और निकास को नियंत्रित किया जाता था. वे इस निजी कंपनी को ये आजादी कैसे दे सकते हैं कि वो जितना चाहें उतने लोगों को पुल पर एंट्री करा दें?'
उन्होंने आगे कहा,
'100 सालों से इस पुल को कुछ नहीं हुआ था, लेकिन मरम्मत के बाद इस पुल के खुलने के पांचवे दिन ही ऐसा हो गया. इसका क्या मतलब है?'
इस घटना के पीड़ित परिजनों ने इस बात को लेकर गहरी नाराजगी जताई है कि प्रशासन ने जूनियर अधिकारियों को गिरफ्तार किया है ताकि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा सके.
विक्रम ने कहा,
'ओरेवा के मालिकों को गिरफ्तार नहीं किया गया है. नगर पालिका के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि पुल को बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के खोला गया है. लेकिन यह कैसे संभव है जब ओरेवा ने पूरे तामझाम के साथ इसकी घोषणा की थी? पुल को डिजाइन करने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.'
मोरबी पुल टूटने की घटना में मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने की घोषणा हुई थी. मोरबी जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के प्रभारी एचआर सांचाला ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 135 मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये का चेक दे दिया गया है.
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