लेकिन अब इस शहीद के परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. ये परेशानी लंबे समय से चल रही है और इससे परेशान होकर उनके एक पोते गुरदेव सिंह ने 9 जनवरी को फांसी लगाकर जान दे दी है.पंजाब के फरीदकोट जिले के चाहल गांव के रहने वाले गुरदेव सिंह किसान थे. फसल अच्छी न होने की वजह से उनपर 20 लाख रुपये का कर्ज हो गया था, जिसे वो चाहकर भी नहीं चुका पा रहे थे. पंजाब में जब 2017 के विधानसभा चुनाव थे, तो कांग्रेस ने सत्ता में आने पर कर्ज माफी का वादा किया था. इसी के तहत पांच जिलों में इस योजना को शुरू किया गया था, जिसमें 47 किसान शामिल थे. इन किसानों को 2-2 लाख रुपये की कर्जमाफी का फायदा मिलना था. गुरदेव सिंह को भी उम्मीद थी कि उन्हें इसका फायदा मिलेगा. लेकिन 9 जनवरी को जब कर्जमाफी के किसानों की लिस्ट आई, तो उसमें उनका नाम नहीं था. इससे परेशान होकर उन्होंने घर में ही फांसी लगाकर जान दे दी.
26 जनवरी और 15 अगस्त के अलावा सरकार को शहीदों की याद या तो उनके जन्मदिन पर आती है या फिर उनकी पुण्यतिथि पर. इसके अलावा उन शहीदों का परिवार किस हालत में है, इसकी सुध किसी सरकार ने नहीं ली. यही वजह है कि सरदार उधम सिंह जैसे शहीद के पोते को फांसी लगाकर जान देनी पड़ी है. और किसानों ने भी उठाए हैं सवाल कर्जमाफी के मुद्दे पर पंजाब में सत्ता में आई कांग्रेस की इस कर्जमाफी योजना पर और भी किसानों ने सवाल उठाए हैं. संगरूर में एक किसान जसवीर सिंह का सिर्फ 5 रुपये का कर्ज माफ किया गया है, जबकि उसपर 65,000 का कर्ज था. इसी गांव के एक किसान हाकम सिंह पर 67,000 का कर्ज था, जो माफ ही नहीं हुआ है. ये भी पढ़ें: कुल तीन UK रहे उधम सिंह की ज़िंदगी के अहम हिस्से उधम सिंह के 'राम मोहम्मद सिंह आजाद' बनने के पीछे की असली कहानी बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां की दोस्ती का किस्सा, जो मौत के बाद ही खत्म हुआ वो स्वदेशी के लिए आंदोलन कर रहा था, उस पर ट्रक चढ़ाकर मार डाला गया वीडियो में जानिए पैराडाइज पेपर लीक करने वाले अखबार की हालत










