तीनों सेनाएं (जल, थल, वायु) एक टीम की तरह काम करेंगी. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के तौर पर जो ज़िम्मेदारी दी गई है उसके तहत हमें तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य को बेहतर करना है और बेहतर रिसोर्स मैनेजमेंट करना है.इसके साथ ही खुद पर लगे राजनीतिक झुकाव के आरोपों पर रावत ने कहा,
हम राजनीति से दूर रहते हैं, बहुत दूर. हमें सरकार के निर्देशों के हिसाब से काम करना पड़ता है.15 अगस्त के भाषण में पीएम मोदी ने पहली बार किया था CDS का जिक्र पीएम मोदी ने 15 अगस्त के भाषण में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का जिक्र किया था. इस जिक्र के बाद ही चर्चा होने लगी कि क्या प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के हाथ में निहित सेना की शक्ति को कमजोर करने वाले हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की मांग देश में करीब 20 साल पुरानी है. और इसकी शुरुआत होती है करगिल युद्ध के दौरान पैदा हुए हालात से. 1999 में करगिल रिव्यू कमिटी ने इस पद का सुझाव दिया था जो रक्षा से जुड़े मसलों पर सरकार का सिंगल-पॉइंट अडवाइजर होगा. सीडीएस की ज़रूरत क्यों पड़ी और उनके काम क्या होंगे इस बारे में विस्तार से यहां पढ़ सकते हैं कैबिनेट कमेटी ने 24 दिसंबर को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की पोस्ट बनाने की मंजूरी दी थी. केंद्र सरकार ने 29 दिसंबर को ही CDS पोस्ट के लिए उम्र की सीमा बढ़ाई थी. सरकार ने CDS की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के नेतृत्व में एक कमिटी बनाई थी. कोई भी CDS, ऑफिस छोड़ने के बाद किसी भी सरकारी कार्यालय में काम नहीं कर सकेंगे. वह CDS पोस्ट से हटने के बाद 5 साल तक बिना इजाजत प्राइवेट नौकरी भी नहीं कर सकेंगे. CDS डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री (यह डिपार्टमेंट रक्षा मंत्रालय के अंदर बनाया जाएगा) के भी प्रमुख होंगे.
विडियोः जानिए भारत के सबसे बड़े सैन्य सुधार CDS की जरूरत क्यों है?


















