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अर्थव्यवस्था के आंकड़े आए हैं, पता है तीसरी तिमाही में GDP का क्या हाल रहा?

कृषि क्षेत्र जो कि 3.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में लगभग 15 प्रतिशत योगदान देता है, सितंबर तिमाही में 1.6 फीसदी की वृद्धि की तुलना में 0.8 फीसदी सिकुड़ गया है.

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इससे पहले की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की GDP ग्रोथ 7.6 फीसदी रही थी. (फोटो- आजतक)

मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के आंकड़े सामने आए हैं. केंद्र सरकार ने बताया है कि इस अवधि में GDP में 8.4 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है जो इसके पूर्वानुमान से ज्यादा है (GDP growth beats estimated growth). सरकार के मुताबिक GDP में आई ये तेजी मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी और सरकारी खर्च में आई बढ़ोतरी के चलते दर्ज की गई है.

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इससे पहले की तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारतीय अर्थव्यवस्था की GDP ग्रोथ 7.6 फीसदी रही थी. सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 29 फरवरी को जारी किए गए आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि भारत की GDP में तेजी आई है. साल-दर-साल 8.4 फीसदी की ये दर 2022 की दूसरी तिमाही के बाद से सबसे ज्यादा बढ़ी है और 6.6 फीसदी के पूर्वानुमान से कहीं ज्यादा है.

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कृषि क्षेत्र जो कि 3.7 ट्रिलियन डॉलर (करीब 3 लाख 6721 अरब रुपये) की भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 15 प्रतिशत योगदान देता है, सितंबर तिमाही में 1.6 फीसदी की वृद्धि की तुलना में 0.8 फीसदी सिकुड़ गया है.

भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार को देखते हुए NSO ने अपने दूसरे पूर्वानुमान में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए देश की ग्रोथ रेट 7.6 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया है. इससे पहले जनवरी 2024 में जारी अपने पूर्वानुमान में चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ रेट 7.3 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था.

PMI से तेजी के संकेत

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) ने 29 फरवरी को परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) जैसे आंकड़ों का जिक्र किया. कहा कि PMI से सर्विस सेक्टर और विनिर्माण गतिविधियों में तेजी के संकेत मिल रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार PMI दिसंबर के 58.5 से बढ़कर जनवरी में 61.2 हो गया है.

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NDTV में छपी रिपोर्ट के मुताबिक विनिर्माण गतिविधि के लिए PMI दिसंबर 2023 के 54.9 से बढ़कर जनवरी में 56.5 हो गया. जबकि सेवाओं के लिए PMI दिसंबर 2023 में 59 था. ये बढ़कर जनवरी में 61.8 हो गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि PMI और जीएसटी संग्रह जैसे मासिक आंकड़े एक मजबूत आर्थिक माहौल की ओर इशारा करते हैं.

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