अमेरिका में एक प्रेग्नेंट महिला को उस वक्त कोर्ट में पेश होना पड़ा, जब वो लेबर पेन में थी. वो भी उनकी इजाजत के बगैर. बताया जा रहा है कि महिला नॉर्मल डिलीवरी से बच्चे को जन्म देना चाहती थी. जबकि, डॉक्टर नॉर्मल डिलीवरी के खतरों का हवाला देते हुए C- सेक्शन के जरिए डिलीवरी करना चाहते थे. इसी बात की सुनवाई होनी थी, जिसके लिए महिला को कार्यवाही में ऑनलाइन पेश किया गया था. इसमें जज समेत कई वकील, डॉक्टर और हॉस्पिटल के स्टाफ भी जुड़े थे.
लेबर पेन में महिला, अचानक स्क्रीन पर आए जज-वकील, क्या हुआ कि अस्पताल में कोर्ट लग गई?
America के Florida में एक प्रेग्नेंट महिला को लेबर पेन के दौरान कोर्ट में पेश होना पड़ा. क्योंकि, उन्होंने बच्चे को पैदा करने के लिए C-सेक्शन कराने से साफ मना कर दिया था.


ProPublica की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना पिछले साल सितंबर 2024 की है. प्रेग्नेंट महिला की पहचान चेरीज डॉयली के तौर पर हुई है, जो लेबर पेन शुरू होने के बाद यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा हेल्थ हॉस्पिटल पहुंचीं थी. डॉक्टरों ने उनकी जांच की और पाया कि नॉर्मल डिलिवरी में 'यूट्राइन रप्चर' (गर्भाशय फटने) का खतरा है. इसी वजह से उनका C- सेक्शन करना पड़ेगा. लेकिन डॉयली ने इनकार कर दिया और नॉर्मल डिलिवरी के लिए कहा.
डॉयली पेशे से एक “बर्थिंग डूला' (डिलिवरी में मदद करने वाली एक्सपर्ट) हैं. अपनी कंडीशन के बारे में उन्हें जानकारी थी. उन्होंने बताया कि उन्हें पता है कि नॉर्मल डिलीवरी में 2% से भी कम चांस है कि “यूट्राइन रप्चर” की स्थिति पैदा हो. बाद में डॉयली ने डॉक्टरों से कहा कि वो C-सेक्शन की परमिशन देने से पहले नॉर्मल डिलीवरी के लिए ट्राई करेंगी. डॉयली की अपील को डॉक्टरों ने माना और उन्हें उस दवाई की डोज दी, जो लेबर पेन बढ़ाती है.
डॉयली का लेबर पेन शुरू हुए लगभग 12 घंटे का समय बीत चुका था. इसके बाद एक नर्स एक चादर लेकर उनके पास आई और खुद को ढकने के लिए कहा. उसके साथ में टैबलेट डिवाइस भी थी. उसने डॉयली को बताया कि इस वक्त वह कोर्ट की कार्यवाही में हैं. क्योंकि उसने सी-सेक्शन से मना कर दिया था. जाहिर है कि डॉयली ये देखकर चौंक गईं.
इसके बाद कोर्ट की सुनवाई शुरू हुई. ProPublica से बात करते हुए डॉयली ने इस घटना को ‘सबसे विचित्र’ बताया. सुनवाई जज माइकल कलील कर रहे थे. उन्होंने डॉयली को बताया कि स्टेट ने हॉस्पिटल के कहने पर एक इमरजेंसी याचिका दायर की है. यह याचिका इसलिए दायर की गई ताकि, गर्भ में पल रहे बच्चे को सुरक्षित C- सेक्शन के जरिए बाहर निकाला जा सके. सुनवाई के दौरान डॉयली ने कहा,
क्या वे मुझे बांधकर मेरी इजाजत के बिना मेरा C-सेक्शन करेंगे?
मामले पर कोर्ट में काफी बहस हुई. जज ने भी फौरन C-सेक्शन का आदेश नहीं दिया. लेकिन उन्होंने अपने आदेश में कहा कि अगर कोई इमरजेंसी सिचुएशन आती है तो डॉक्टर मरीज की परमिशन के बिना ही सर्जरी कर सकते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, रात भर में बच्चे की धड़कन काफी कम हो गई, जिसके बाद वे डॉयली को फौरन सर्जरी के लिए ले गए. यहां उन्होंने C-सेक्शन से बच्चे को पैदा किया. डिलीवरी के बाद अगले दिन फिर डॉयली को कोर्ट के सामने पेश किया गया.
इस दौरान डॉयली ने कोर्ट को बताया कि अभी तक उन्हें उनकी बेटी से NICU (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में मिलने नहीं ले जाया गया. इस पूरी घटना को 1 साल से भी ज्यादा का समय हो गया है लेकिन डॉयली इस घटना को नहीं भूली हैं. उन्होंने एक साल बाद इस पर ProPublica से बात करने की सहमति जताई, जिसके बाद ये मामला मीडिया के सामने आया. इस संवाद में उन्होंने इस घटना को अपना ‘अपमान’ बताया और कहा कि कोर्ट और हॉस्पिटल में जो भी हुआ वो उनके लिए एक ‘सजा’ जैसा है.
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