11 साल बाद गैंगरेप विक्टिम बोली, 'अब जश्न की बारी मेरी'
गौरव शुक्ला सपा के एक बड़े नेता का भतीजा है. इसलिए उसने कानून के हर दांव पेंच का इस्तेमाल किया.
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फोटो - thelallantop
वो ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेंस एसोसिएशन के लखनऊ ऑफिस में आकर बैठी. बुधवार का दिन. साड़ी पहने और बालों को कंधों पर बिखेरे हुए. चेहरे पर कभी गुस्सा आकर लौटता था कभी उकताहट. वो बेसब्री से फोन का इंतजार कर रही थी. आखिर शाम साढ़े चार बजे वो फोन आया. जिसमें वो एक खबर का इंतजार कर रही थी. पिछले 11 साल से. बात करके एकदम से शांत हो गई. जैसे उस वक्त के सुकून को पूरी तरह महसूस कर लेना चाहती है. वह लम्हा बीत जाने के बाद खुद को समेट कर बताना शुरू किया "2 मई 2005 की रात आज भी याद है. जब गौरव शुक्ला और उसके दोस्तों ने मुझे चलती कार में घसीटा. सीट पर डाल कर मेरे कपड़े फाड़े. और मेरे साथ हैवानियत की हर हद पार की. मेरे प्राइवेट पार्ट में गन डाली. सिगरेट से जलाया. मैं रहम के लिए रोती रही. लेकिन वो नहीं माने. वह उनके लिए पार्टी टाइम था. वो जश्न मना रहे थे शराब, तेज म्यूजिक और मेरे साथ रेप करके." थोड़ा रुक कर बोली "अब सेलिब्रेट करने की बारी मेरी है. ये 11 साल बड़ी मुश्किल में बीते. हर एक दिन उस रात को याद करके. कानून की देरी मेरी चिंता बढ़ाती जाती थी. मैं उसके लिए ताउम्र कैद से नीचे कुछ नहीं चाहती. मैं चाहती हूं कि वो उसी तरह सालों साल झेले जैसे मैंने 10 साल से ज्यादा गुजारे." ये लड़की थी लखनऊ के आशियाना गैंगरेप की विक्टिम. आगे इस लड़की की बहादुरी और केस की पूरी कहानी पढ़ो. क्योंकि इस केस का फैसला आया है. लखनऊ का आशियाना रेप केस बहुत लंबा खिंच गया. कानूनी लड़ाई 11 साल चली. लखनऊ की निचली अदालत ने अब इसका फैसला दिया है. खुद को नाबालिग बता रहा था मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला. अब उसे दोषी करार दिया गया है. सजा 16 अप्रैल को सुनाई जाएगी. केस के तीन आरोपियों को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है. दो आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई.
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