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BJP में शामिल हुए गंभीर ने कुछ दिन पहले कहा था- कोई मुझे क्रिकेटर होने की वजह से वोट न दे

तो क्या गौतम गंभीर की कोई और पहचान भी है जो उन्हें चुनाव जितवाएगी ?

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बीजेपी मुखिया अमित शाह की मौजूदगी में गौतम गंभीर ने पार्टी जॉइन की.
पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने देश में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा जॉइन कर ली है. दिल्ली में अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी में गंभीर ने 22 मार्च को पार्टी जॉइन की. बीते साल दिसंबर में जब से गंभीर ने क्रिकेट से रिटायरमेंट ली थी, तभी से ये लगने लगा था कि वो भाजपा में शामिल हो सकते हैं. दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में पार्टी में शामिल होते हुए गंभीर ने कहा कि वो पीएम मोदी के विजन से प्रभावित होकर पार्टी जॉइन कर रहे हैं. खबर है कि गंभीर नई दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. यहां पंजाबी वोटरों की अच्छी खासी तादाद है. अभी यहां से बीजेपी की मीनाक्षी लेखी सांसद हैं. इस बार लेखी का टिकट कटने के पूरे आसार हैं.
चाहे दिल्ली में आम आदमी पार्टी को प्रदूषण के लिए खुलेआम कोसना हो या फिर कश्मीर में आतंकवाद को लेकर उमर अब्दुल्ला से बहस, गंभीर लगातार देश में अलग-अलग मसलों पर अपनी राय रखते रहे हैं.पाकिस्तान के साथ इंडिया के क्रिकेट संबंधों पर भी गंभीर ने मुखर होकर कहा है कि इस मुल्क के साथ हर तरह का क्रिकेट बंद होना चाहिए. वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के साथ कोई भी मैच न खेलने की वकालत करने वाले गंभीर देश के लिए शहीद होने वाले सैनिकों के परिवारों की मदद के मामले में भी आगे रहे हैं.
कुछ वक्त पहले जब राजनीति में आने की अटकलों पर इनसे सवाल किए गए थे, तो  गंभीर ने कहा था, "अगर मैं राजनीति में कभी गया तो लोगों से यही कहूंगा कि वो क्रिकेटर गंभीर को वोट न दें. मैं उनसे कहूंगा कि वो उस गौतम गंभीर को वोट दें जो जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की लक्ष्य रखता है. उनकी जिंदगी में बदलाव लाना चाहता है. मैं झूठ की राजनीति पसंद नहीं करता. मैं वही कहता हूं जो मैं कर सकता हूं. इसमें जो लोग भरोसा करते हैं, वही मुझे वोट दें. मैं सत्ता का भूखा नहीं हूं."
खैर, ये तो तभी पता चलेगा जब गंभीर नेता बनेंगे. अभी ये जान लीजिए कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में एक क्रिकेटर देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गया, वहीं अपने देश में भी ऐसे कई क्रिकेटर हुए हैं जो राजनीति में भी चमके हैं. सबसे पहला नाम है मंसूर अली खान पटौदी का है जो विशाल हरियाणा पार्टी से 1971 में और फिर 1991 में कांग्रेस की टिकट भोपाल से चुनाव लड़े और हारे थे. अगला नाम चेतन चौहान का है जिन्होंने 40 टेस्ट और 7 वनडे खेले. उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 1991 और 1998 में लोकसभा चुनाव लड़े और जीते. फुल टाइम पॉलिटिक्स में हैं. अब अमरोहा से विधायक हैं और यूपी में बीजेपी की सरकार में स्पोर्ट्स मिनिस्टर हैं. इस लिस्ट में इंडिया के लिए पहली बार 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे कीर्ति आजाद का नाम भी है. कीर्ति ने बीजेपी के टिकट से बिहार के दरभंगा से लोकसभा चुनाव जीता. फिर दिल्ली में गोल मार्केट सीट से विधायकी जीती और अभी भी वो दरभंगा से लोकसभा सांसद हैं. कीर्ति आजाद के पिता भागवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं. अब 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कीर्ति कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.
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केरल में एस श्रीसंथ ने भी भाजपा की टिकट से विधायकी लड़ी थी, मगर वो चुनाव हार गए थे.

कीर्ति के अलावा सक्रिय राजनीति में नवजोत सिंह सिद्धू भी हैं. पंजाब की कांग्रेस सरकार में मंत्री हैं. पहले बीजेपी के अमृतसर से सांसद थे. इनके अलावा मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 2009 में कांग्रेस जॉइन की और यूपीए सरकार में यूपी के मुरादाबाद से सांसद रहे हैं. मनोज प्रभाकर, मोहम्मद कैफ और एस श्रीसंत के नाम शामिल हैं. इनमें से चेतन चौहान यूपी में कैबिनेट मिनिस्टर हैं, कीर्ति आजाद भाजपा से कांग्रेस में चले गए और सिद्धू पंजाब सरकार में मंत्री हैं. इनके अलावा इंडियन क्रिकेटरों में मनोज प्रभाकर ने 1998 में नई दिल्ली लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ा और हारा. मोहम्मद कैफ ने भी यूपी के फूलपुर से 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा था. कैफ ने कांग्रेस के टिकट पर राजनीति में अपना हाथ अजमाया. अब क्रिकेट कमेंट्री करते हैं. इनके अलावा विनोद कांबली और एस श्रीसंत भी एक बार चुनाव लड़ चुके हैं. कांबली ने 2009 में लोक भारती पार्टी से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ा था. वहीं श्रीसंत ने केरल में बीजेपी की टिकट से 2016 में विधानसभा चुनाव लड़ा और हारा.


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