संयुक्त किसान मोर्चा ने आज सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों के बारे में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए अपने प्रस्ताव के बारे में बयान पर संज्ञान लिया. किसान अपनी चुनी हुई सरकार को मनाने के लिए दिल्ली की चौखट पर आए हैं. और इसलिए सरकार से बातचीत पर किसान संगठनों का दरवाजा बंद करने का कोई सवाल ही नहीं है. किसान तीनों कानूनों को पूर्ण रूप से निरस्त कराना चाहते हैं. और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी चाहते हैं.
गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस की ओर से लगाई गई 12 लेयर की बैरिकेडिंग
किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उठाया कदम, NH-24 बंद.
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दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस ने रातोंरात 12 लेयर की बैरिकेडिंग कर दी है. फोटो-आज तक
तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी है. गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन का आज यानी रविवार, 31 जनवरी को 65वां दिन है. किसानों की संख्या बढ़ने के साथ ही गाजीपुर बॉर्डर को किले में तब्दील कर दिया गया है. आज तक के सुशांत मेहरा की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस ने रातों-रात 12 लेयर की बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि किसान दिल्ली की ओर कूच ना कर सकें. गाजीपुर बॉर्डर पर यह बैरिकेडिंग दिल्ली पुलिस की तरफ से की गई है. पुलिस को आशंका है कि एक फरवरी को बजट सत्र के दौरान किसान एक बार फिर दिल्ली की तरफ कूच कर सकते हैं. इसी वजह से बॉर्डर पर 12 लेयर की बैरिकेडिंग की गई है. NH-24 को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. नोएडा से अक्षरधाम जाने वाले रास्ते के साथ-साथ दिल्ली से इंदिरापुरम और नोएडा जाने वाले रास्ते को भी बंद किया गया है.
26 जनवरी की हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से गाजीपुर बॉर्डर को खाली करने का आदेश दिया गया था, लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत के रोने की घटना के बाद एक बार फिर गाजीपुर बॉर्डर पर लोग बड़ी तादाद में जुटने शुरू हो गए हैं. वहीं पीएम मोदी की ओर से किसानों और सरकार के बीच सिर्फ एक कॉल की दूरी वाले बयान पर भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो कहा है, उसका स्वागत करते हैं, हमारी तो बस यही मांग है कि तीनों काले कानून वापस लिए जाएं और MSP पर कानून बनाया जाए. वहीं संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 30 जनवरी को जारी बयान में कहा गया है,
बयान में कहा गया है कि हम सुरक्षाबलों के गैरकानूनी उपयोग द्वारा इस आंदोलन को खत्म करने के लिए पुलिस के प्रयासों की निंदा करते हैं. पुलिस अमानवीय ढंग से प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को गिरफ्तार कर रही है. हम शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग करते हैं. हम पत्रकारों पर पुलिस के हमलों कि निंदा करते हैं. 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में कई जगहों पर हिंसा हुई थी. इसके बाद 29 जनवरी को सिंघु बॉर्डर पर भी पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई. इस मामले में अब तक 44 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, पुलिस को हिंसा से संबंधित 1700 वीडियो क्लिप और CCTV फुटेज मिले हैं. अब तक दिल्ली पुलिस ने 38 FIR दर्ज की हैं और 84 लोगों को गिरफ्तार किया है.
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