अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने F-15 फाइटर जेट के दूसरे क्रू मेंबर को बचाने की पूरी कहानी सुनाई है. यह एयरक्रॉफ्ट 4 अप्रैल को ईरान के अंदर क्रैश हो गया था. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में बताया कि फाइटर जेट से इजेक्ट होने के बाद पायलट ने एक रेडियो मैसेज भेजा था- ‘ईश्वर महान है’ (God is good). उन्होंने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों को शुरू में डर था कि यह मैसेज ईरान की साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद अमेरिकी सेना को अपने जाल में फंसाना था.
अमेरिकी पायलट 24 घंटे छिपा रहा, फिर हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, ईरान को भनक न लगी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि F-15 Fighter Jet से इजेक्ट होने के बाद पायलट ने एक रेडियो मैसेज भेजा था. इस मैसेज ने थोड़ी देर के लिए यह चिंता बढ़ा दी कि शायद उसे पकड़ लिया गया है और ईरानी सेना जाल बिछाने के लिए गलत सिग्नल भेज रही है. फिर क्या हुआ?


शुक्रवार, 4 अप्रैल को ईरान ने एक अमेरिकी ‘F-15E स्ट्राइक ईगल’ को मार गिराया था. अमेरिका ने प्लेन के मुख्य पायलट को तुरंत बचा लिया था, लेकिन दूसरे पायलट (वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर) को रेस्क्यू नहीं कर सका. इसके बाद अमेरिकी सेना ने उसे बचाने के लिए ईरान के अंदर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. 5 अप्रैल को डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के पहाड़ी इलाके में फंसे अपने पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है.
अमेरिकी डिजिटल मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ को दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने बताया कि दूसरे पायलट ने फाइटर जेट से इजेक्ट होने के बाद एक रेडियो मैसेज भेजा था. उन्होंने बताया कि इस मैसेज ने कुछ समय के लिए यह शक पैदा कर दिया था कि कहीं ईरानी सेना जाल बिछाने के लिए झूठे संकेतों का इस्तेमाल तो नहीं कर रही है. ट्रंप ने दावा किया कि घायल ऑफिसर पहाड़ी इलाके में 24 घंटे से ज्यादा समय तक जीवित रहा, जिसके बाद उसे रात के समय चलाए गए एक बेहद जोखिम भरे स्पेशल फोर्सेज मिशन के जरिए वहां से निकाला गया. इस मिशन में लगभग 200 सैनिक शामिल थे.
ट्रंप के मुताबिक, वह पायलट पहाड़ की एक दरार में छिपा रहा, जबकि हजारों ईरानी सैनिक और स्थानीय नागरिक उसे ढूंढ रहे थे. कथित तौर पर ईरान ने उसे पकड़ने वालों के लिए इनाम का भी ऐलान किया था. अमेरिकी सर्विलांस टेक्नोलॉजी ने आखिरकार उसकी लोकेशन ट्रैक कर ली, लेकिन एक अजीब रेडियो मैसेज ने थोड़ी देर के लिए यह चिंता बढ़ा दी कि शायद उसे पकड़ लिया गया है और ईरानी सेना गलत सिग्नल भेज रही है. अधिकारियों ने बाद में कन्फर्म किया कि ऑफिसर जिंदा है और अभी भी पकड़ा नहीं गया है.
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दो रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए
F-15 पायलट को बचाने के लिए दो ऑपरेशन चलाए गए. पहला ऑपरेशन दिन में चलाया गया. दूसरा मिशन रात के समय चलाया गया, जब अमेरिकी सेना ने ईरानी क्षेत्र के अंदर एक अस्थायी बेस बना लिया था. ट्रंप ने दावा किया कि इलाके में बहुत ज्यादा लड़ाई के बावजूद, पायलट को आखिरकार सुरक्षित बचा लिया गया.
डॉनल्ड ट्रंप ने एक्सियोस को यह भी बताया कि ऑपरेशन के दौरान इजरायल ने सीमित मदद दी. अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इजरायली खुफिया एजेंसी ने लापता अफसर का पता लगाने में सीधे तौर पर मदद नहीं की, लेकिन उसने ईरानी सैनिकों की गतिविधियों के बारे में जानकारी ज़रूर दी. इसके अलावा, कथित तौर पर इजरायली वायु सेना ने रेस्क्यू जोन की तरफ बढ़ रही ईरानी सेना को धीमा करने के लिए एक हमला भी किया था. इस साझेदारी को मजबूत बताते हुए, ट्रंप ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान दोनों सहयोगी देशों ने मिलकर काम किया था.
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