न्यूजीलैंड के क्राइसचर्च में एक आतंकी ने 49 निहत्थे नमाजियों को मौत के घाट उतार दिया. अलनूर मस्जिद में उस वक्त नमाज चल रही थी और ब्रेंटन टैरंट नाम के इस ऑस्ट्रेलियाई आतंकी ने मस्जिद में घुसते ही वहां सामने आए लोगों पर गोलियां बरसा दीं. यहां अपनी जान खोने वालों में एक प्रत्यक्षदर्शी ऐसे भी थे जो व्हीलचेयर पर थे. नाम फरीद अहमद. वो अपनी पत्नी के साथ वहां आए थे. खुद पुरुषों के हॉल में बैठे और पत्नी महिलाओं के हॉल में थीं. मीडिया से बात करते हुए इन्होंने बताया," उस वक्त हॉल में शांति का माहौल था. सब लोग ध्यान से इमाम का प्रवचन सुन रहे थे. तब अचानक शूटिंग शुरू हो गई. शूटर ने मेन रूम में ये करना शुरू किया और मैं बगल के कमरे में था. मैंने देखा कि लोग चीख चिल्ला रहे हैं, खून में लथपथ पड़े हैं." वहीं दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक फरीद ने कहा कि वो वहीं अपने स्थान पर लेट गए. 'शूटर आसपास के लोगों पर गोलियां बरसाता रहा और मैं अपनी जगह पर लेटा रहा. मैं हिला नहीं. मेरे कपड़ों पर बाकियों के खून के धब्बे लग गए थे और शूटर को लगा कि मुझे भी गोली लग चुकी है और मैं मर चुका हूं. उसने उस कंपार्टमेंट में 7 बार राइफल की मैग्जीन खाली की. फिर वो अगल कंपार्टमेंट में चला गया. जब मैं खड़ा हुआ तो आसपास दो दर्जन से ज्यादा लाशें थीं. मेरे सिवाए कोई जिंदा नहीं बचा था." 49 लोगों की हत्या करने के जुर्म में इस आतंकी पर केस चलाया जा रहा है. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डन ने देश में हथियारों से जुड़े नियमों में बदलाव के संकेत दिए हैं. 28 साल के ब्रेंटन को शनिवार को वहां क्राइसचर्च के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेश किया गया और 5 अप्रैल को अब इसकी पेशी वहां के हाई कोर्ट में होगी.
लल्लनटॉप शो देखिए-
'मैं लाशों के बीच लेटा था और आतंकी को लगा मैं भी मर गया और वो आगे चला गया'
न्यूजीलैंड में मस्जिद पर हमले के प्रत्यक्षदर्शी ने बताई आपबीती.
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प्रत्यक्षदर्शी फरीद अहमद और दूसरी तस्वीर में पुलिस हिरासत में आतंकी ब्रेंटन.
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