केंद्र सरकार की जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेताओं के बाद अब हाल के दिनों के दो प्रदर्शनों में शामिल हुए लोगों की ओर रुख किया है. इनमें से एक प्रदर्शन निलंबित बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी करने को लेकर हुआ था. वहीं दूसरा प्रदर्शन सशस्त्र बलों की भर्ती योजना अग्निवीर से जुड़ा हुआ है.
अग्निवीर और नूपुर शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले ED के रडार पर, बड़ी तैयारी में जांच एजेंसी
इस कड़े कानून के तहत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की संभावनाएं तलाश रही है ED.


इंडियन एक्सप्रेस के दीप्तिमान तिवारी की एक रिपोर्ट के मुताबिक ED ने यूपी पुलिस से आरोपियों से जुड़े केस दस्तावेज मांगे हैं. एजेंसी ने कहा है कि वो ये पता लगाना चाहती है कि क्या वो इन व्यक्तियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई कर सकती है.
इसी तरह अग्निपथ योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल बिहार के कोचिंग सेंटर की भी जानकारी मांगी गई है. ED उसके खिलाफ भी कार्रवाई करने की संभावनाएं तलाश रही है. इस बारे में एक वरिष्ठ ED अधिकारी ने अखबार को बताया,
'हम दोनों मामलों को मनी-लॉन्ड्रिंग के नजरिये से देख रहे हैं. पैगबंर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी को लेकर हुए प्रदर्शनों के संबंध में हमें पता चला है कि ऐसे कुछ संगठन हैं, जो इस्लामिक मुद्दों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों का आयोजन कर रहे हैं. हमने यूपी से दस्तावेज मांगे हैं, जिन्होंने इन संगठनों के सदस्यों को गिरफ्तार किया है.'
अधिकारी ने बताया कि वे अग्निपथ प्रदर्शन को लेकर बिहार के कोचिंग सेंटर्स की भूमिका की जांच कर रहे हैं. ED अधिकारी ने कहा,
'बिहार में कुछ कोचिंग सेंटर्स ने विरोध प्रदर्शनों को हवा दी थी. हम इस मामले की जांच कर रहे हैं. अगर हमें इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि उन्होंने इन प्रदर्शनों को फंड किया था तो हम मनी-लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कार्रवाई करेंगे.'
मालूम हो कि पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी को लेकर उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान कई जगहों से पत्थरबाजी और पुलिस के साथ मारपीट, हिंसा की भी खबरें आईं. यूपी के कानपुर, फिरोजाबाद, अलीगढ़, हाथरस, मुरादाबाद, अंबेडकर नगर, जालौन, सहारनपुर, प्रयागराज जिले में बड़े प्रदर्शन हुए थे.
यूपी पुलिस ने इस संबंध में 10 जिलों से कुल 424 लोगों को गिरफ्तार किया है और 20 एफआईआर दर्ज की गई हैं. इसके साथ ही प्रदर्शन में शामिल कई लोगों के घरों को ‘अवैध’ बताकर बुलडोजर से गिराया गया है और सार्वजनिक स्थलों पर आरोपियों के पोस्टर लगाए गए थे. सुप्रीम कोर्ट में घर गिराने के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई हैं, जो कि अभी विचाराधीन है.
वहीं, अग्निपथ योजना को लेकर बिहार के गोपालगंज, कैमूर, छपरा, दानापुरी, लखीसराय और समस्तीपुर में बड़ा प्रदर्शन हुआ था. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई ट्रेनों में आग लगा दी थी और काफी तोड़-फोड़ की थी.
इसे लेकर बिहार पुलिस ने कम से कम 922 लोगों को गिरफ्तार किया है. उन पर तोड़फोड, आगजनी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है. इस संबंध में पुलिस ने अब तक कुल 161 एफआईआर दर्ज क हैं.






















