अमेरिका से भी न, जैसे कोई डिवाइन रिवेंज ले रहा है. हम राज ठाकरे, मायावती, जीतनराम , मोदी, केजरीवाल, राहुल से परेशान रहते हैं. अमेरिका को भगवान ने सब एक ही पैक में दे दिया. नाम दिया डोनाल्ड ट्रम्प. मेरे को न डोनाल्ड डक भोत पसन था, लेकिन अब तो डोनाल्ड के नाम से कैसा-कैसा लगने लगा है. पर एक बात है डोनाल्ड ट्रम्प बहुत प्रभावी नेता हैं. हजारों मील दूर से आपको इरिटेट कर सकते हैं.
फिलहाल क्या किए कि गांधी जी के नाम से एक कोट उठाकर डाल दिए, इंस्टाग्राम पर. सोचे थे लोग गांधीवादी समझेंगे. वाहवाही होगी. गांधी जी सबको ईजी पड़ते हैं न. पर उल्टा ही हो गया. अमेरिकी मीडिया ने कहा ये तो गांधी जी कभी कहे ही नहीं थे. लोग चढ़ बइठे. लुल्ल बज गई. डोनाल्ड को सबक मिल गया. गांधी जी सबको नहीं फलते.

फिर एक और कारनामा सुनिए.एक यूनिवर्सिटी में रैली थी. 30 ठो बच्चे भी थे. रंग में काले. वहां भी भेदभाव होता है, रंग के आधार पर. अमेरिका इत्ता अच्छा भी न है, जित्ता 1080p में नजर आता है. उन बच्चों को रैली से निकल जाने को कहा. स्टेज पर जाने से पहले ट्रम्प ने उन सारे बच्चों से बाहर जाने को कह दिया. एक ने फोटो खींच ली. इंस्टा पर चढ़ा दी. फिर हौंकाई शुरू हो गई. ट्रम्प की.