गली के कुत्तों का मामला सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा है. बुधवार को कोर्ट ने ऑर्डर जारी किए हैं. कि सभी राज्यों के चीफ सेक्रेट्री और प्रशासन लग कर आवारा कुत्तों का हिसाब करें. उनका वैक्सीनेशन कराएं. रैबीज खत्म करने के लिए. बढ़ती तादाद को कंट्रोल करने का जुगाड़ लगाए. एनिमल बर्थ कंट्रोल डॉग्स रूल 2001 के हिसाब से. इससे संबंधित खबरें टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी हैं. आप पढ़ लो अगर काम की लगे.
अब देखो ये मामला इत्ती दूर पहुंचा कैसे?
केरल की एक विधवा
केरल में एक आदमी दिहाड़ी मजदूरी करता था. उसे गली के कुत्ते ने काट लिया. जिससे उसकी मौत हो गई. अब वो विधवा अपने छोटे अंधे बच्चे के साथ घर में रहती है. बच्चा कुत्तों की आवाज से डरता है. घर से बाहर नहीं निकलता. उसका जिक्र करते हुए वकील वीके बीजू ने कहा सुप्रीम कोर्ट को ये डिसाइड करना चाहिए. कि गली का कुत्ता काटने पर नुकसान की भरपाई किसकी तरफ से होगी. एनिमल लवर्स जो हैं इन कुत्तों के लिए बहुत काम करते हैं. उनके लिए खाना, रहने का जुगाड़ करते हैं. सर्दियों में कपड़े देते हैं. लेकिन उनके वैक्सीनेशन में हेल्प नहीं करते. और जो कुत्ते लोगों को काट लेते हैं उसके लिए कुछ नहीं करते.
दो आतंकी हमलों में इतने लोग नहीं मरे जितने कुत्ता काटने से
ये मुंबई की रिपोर्ट है. पिछले 20 साल में वहां इतने लोग कुत्ता काटने से मरे हैं, जितने 1993 के सीरियल ब्लास्ट और 26/11 अटैक मिला कर नहीं मरे. 1994 से अब तक आवारा कुत्तों के रैबीज से 429 लोग मर चुके हैं. काटे कितनों को ये तो पूछो ही मत यार. करीब 13.12 लाख लोग इनके शिकार हुए. 1993 में जो ब्लास्ट हुए उनमें 257 लोग मरे. 717 घायल हुए. 26/11 अटैक में 164 लोग मरे. 308 घायल हुए. दोनों का टोटल कर लो 421 मरे और 1025 घायल हुए. कुत्तों के शिकार इनसे ज्यादा हैं. इसीलिए अब सारी कवायद चल रही है कि इन कुत्तों का पुख्ता इंतजाम किया जाए. एंटी रैबीज टीके लगा कर. बधिया करके और हर मुमकिन कोशिश करके इनका आतंक रोका जाए.