मध्य प्रदेश के कटनी जिले के डॉक्टर्स को एक 'सैल्यूट' तो बनता है. इतने कर्मठ हैं कि क्या ही बताएं. अस्पताल की एक 'जरूरी' मीटिंग में ऐसा मशरूफ हुए कि दुनियादारी, फर्ज सब भूल गए. अस्पताल के बाहर लेबर पेन से कराह रही औरत की डिलिवरी कराने की 'फुर्सत' नहीं मिली.
मध्य प्रदेश के भोपाल में एक औरत ने अस्पताल के बाहर अपने बच्चे को जन्म दिया. वजह थी, अस्पताल स्टाफ का एक मीटिंग में बिजी होना. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, जब औरत की डिलिवरी कराने के लिए वहां कोई डॉक्टर, स्टाफ आगे नहीं आया. तब अस्पताल में इलाज कराने आईं औरतें आगे आईं. अस्पताल के बाहर साड़ी का टेंट बनाया और वहीं करवा दी औरत की डिलिवरी.
रमादेवी अपने परिवार के साथ कटनी जिले में रहती हैं. प्रेग्नेंट थी. 9 महीने पूरे हो गए थे. बच्चे को कभी भी जन्म दे सकती थी. शुक्रवार को रमा को लेबर पेन शुरू हुआ. उसके पति रघुवेंद्र ने फौरन 108 नंबर मिलाकर सरकारी अस्पताल के एंबुलेंस सेवा को बुलाया. रमा का दर्द बढ़ता जा रहा था. जल्दी ही वो अस्पताल पहुंच गए. रघुवेंद्र उतर कर अस्पताल में गए ताकि वार्ड बॉय को बुला सके. और वो रमा को अंदर ले जाने में मदद कर सकें. पर अंदर जाने के बाद उसे अस्पताल का कोई भी स्टाफ नहीं दिखा. आधे घंटे वेट करने के बाद उसे पता चला कि डॉक्टर्स और बाकी स्टाफ की मीटिंग चल रही है. इसी बीच रमा दर्द से चिल्ला उठी. उसकी चीख सुनकर अस्पताल में भर्ती महिला मरीजों ने रमा को एंबुलेंस से बाहर निकाला. फटाफट साड़ी से टेंट टाइप का बनाया और बच्चे की डिलिवरी कराई. सबकुछ हो जाने पर एक नर्स वहां आई और मां-बच्चे को वार्ड में ले गई.
अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर उमेश नामदेव ने कहा, 'एक डॉक्टर इमरजेंसी वार्ड में मौजूद था. वो तो इन औरतों का ही बड़ा मन हो रहा था डिलिवरी कराने का. इसलिए उत्सुक औरतों ने रमा की डिलिवरी बाहर ही करवा दी. जैसे ही मेरे पास खबर आई, मैंने कुछ स्टाफ को तुरंत भेज दिया था.' हेल्थ मिनिस्टर रुस्तम सिंह का कहना है कि मुझे तो कुछ पता ही नहीं था इसके बारे में. बाद में इसे सुलझाया जाएगा, मैं अभी बहुत बिजी हूं.
सेम टू सेम वाकया कुछ दिन पहले भी हुआ था. जिसमें 65 साल की एक औरत खुद से रिक्शा चलाकर एक प्रेग्नेंट औरत को अस्पताल लाई थी. इस औरत को भी बच्चा होने वाला था. 108 पर एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल किया, पर किसी ने फोन नहीं उठाया था.