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डिजिटल अरेस्ट वाले इस महिला के आगे हारे, गैंग में शामिल होने का ऑफर दे डाला

Digital Arrest करने वाले कुछ ही वक्त में लाखों-करोड़ों का चूना लगा देते हैं. लेकिन यूपी के सहारनपुर में अलग ही वाकया हुआ. यहां डिजिटल फ्रॉड करने वाले एक शख्स ने अपनी पोल खुलने पर महिला को ही अपने गिरोह में शामिल होने का ऑफर दे डाला.

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फ्रॉड करने में रहा नाकाम तो पीड़िता को गिरोह में शामिल होने का ऑफर दे दिया (फोटो साभार: आजतक (प्रतीकात्मक)

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के मामलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. अपने आस-पास अगर नजर डालें तो कोई न कोई शख्स आपको ऐसा मिल ही जाएगा, जिसके पास Digital Arrest से रिलेटेड कॉल आया हो. कुछ इसका शिकार भी हो जाते है. ठगी करने वाले कुछ ही वक्त में लाखों-करोड़ों का चूना लगा देते हैं. लेकिन यूपी के सहारनपुर में अलग ही वाकया हुआ. यहां डिजिटल फ्रॉड करने वाले एक शख्स ने अपनी पोल खुलने पर महिला को ही अपने गिरोह में शामिल होने का ऑफर दे डाला.

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बेटे को लेकर किया ब्लैकमेल

मामला सहारनपुर का बताया जा रहा है. यहां रहने वाली शगुफ्ता के पास 4 दिसंबर को एक कॉल आता है. ये कॉल Digital Arrest करने वाले शख्स का था. शगुफ्ता पेशे से नर्स हैं. आजतक से बात करते हुए उन्होंने बताया कि कॉल करने वाले शख्स ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया. इसके बाद उसने पूछा कि तुम्हारा बेटा रुड़की में पढ़ता है न? शगुफ्ता ने हां में जवाब दिया. इस पर उसने कहा कि यहां एक लड़की के साथ रेप हो गया है. उसमें चार लड़के शामिल थे. लड़की का मर्डर भी हो गया है. मौके पर तुम्हारा बेटा मिला है.  

ये सुनकर शगुफ्ता के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. रोते-रोते शगुफ्ता ने कहा कि बेटे से मेरी बात कराओ. उस शख्स ने तुरंत किसी लड़के को फोन पकड़ा दिया, जो बस रोये जा रहा था और कह रहा था- “मम्मी बचा लो, प्लीज मम्मी बचा लो.” इसके तुरंत बाद शख्स पैसों की मांग करने लगा. उसने कहा- "पैसे भेजो तो बेटे को छोड़ देंगे." 

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दरअसल, डिजिटल फ्रॉड करने वाले आरोपी लोगों को ठगने के लिए ये सब तैयारी पहले से ही करके रखते हैं. इनका ही कोई साथी रोने का नाटक करता है ताकि लोगों को उन पर भरोसा हो सके.

शगुफ्ता की दोस्त ने चेताया

शगुफ्ता ने आजतक को बताया,

“उस वक्त मेरे अकांउट में सिर्फ 6000 रुपये ही थे. मैंने पैसे भेजने का पूरा मन बना लिया था. लेकिन साथ काम करने वाली मेरी सहयोगी नर्स ने ऐसा करने से मना कर दिया. उसने पहले भी डिजिटल फ्रॉड के ऐसे मामले सुन रखे थे. मैंने तुरंत अपने बेटे को फोन लगाया. पता चला कि बेटा सही सलामत है और रूड़की में रहकर पढ़ाई कर रहा है.”

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इसके बाद शगुफ्ता ने कॉल काट दिया. इसके बाद भी लगातार डिजिटल फ्रॉड करने वाले शख्स का कॉल आ रहा था.

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गिरोह में शामिल होने का दिया ऑफर

शगुफ्ता ने बताया कि ट्रू कॉलर पर ‘पाकिस्तान’ का नाम लिखा आ रहा था. उनका कहना है कि लहजे से भी शख्स पाकिस्तान का ही लग रहा था. उसके बार-बार फोन करने से परेशान होकर उन्होंने कॉल पिक किया. इस बार खूब सुनाया और धमकाया भी. पोल खुलने पर शख्स शगुफ्ता से बोला,

“हमारे साथ आ जाओ. मुझे ये काम करके यहां बहुत इज्जत मिलती है, मैं आपको भी स‍िखा दूंगा. यही काम करके मेरा यहां महल बना हुआ है.”

आजतक से बातचीत में शगुफ्ता ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है.

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