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सीजफायर में खेल गया ईरान, मिसाइल क्षमता बहाल की, ज्यादातर लॉन्च के लिए तैयार

ईरान के पास अभी भी देश भर में लगभग 70 प्रतिशत मोबाइल लॉन्चर तैनात हैं. साथ ही तेहरान के पास युद्ध के पहले मिसाइल का जितना बड़ा स्टॉक था, उसमें से 70 प्रतिशत स्टॉक अब भी बचा हुआ है. इस स्टोरेज में बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हैं, जो वेस्ट एशिया के दूसरे देशों को भी निशाना बना सकती हैं.

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ईरान ने अपने अधिकतर मिसाइल साइट्स को फिर से कब्जे में ले लिया है. (Reuters)

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप लगातार ईरान की सैन्य क्षमता को तबाह कर देने का दावा कर रहे हैं. लेकिन इस बीच आई एक खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अपने अधिकतर मिसाइल साइट, लॉन्चर्स और अंडरग्राउंड फैसिलिटीज तक फिर से पहुंच बना ली है. अमेरिका और इजरायल के हमलों में इनमें से कई ठिकाने तबाह हो गए थे.

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न्यूयॉर्क टाइम्स ने कुछ सीनियर खुफिया अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास स्थित अपने 33 मिसाइल साइट्स में से 30 को फिर से ऑपरेशनल कर दिया है. इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, ईरान इन साइट्स पर मौजूद मोबाइल लॉन्चर्स का इस्तेमाल करके मिसाइलों को दूसरी जगह पर शिफ्ट कर सकता है. वहीं कुछ जगहों पर वे लॉन्चपैंड से सीधे मिसाइल भी दाग सकते हैं. हॉर्मुज के पास मौजूद केवल 3 ठिकाने ईरान की पहुंच से अब भी दूर हैं.

खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास अभी भी देश भर में लगभग 70 प्रतिशत मोबाइल लॉन्चर तैनात हैं. साथ ही तेहरान के पास युद्ध के पहले मिसाइल का जितना बड़ा स्टॉक था, उसमें से 70 प्रतिशत स्टॉक अब भी बचा हुआ है. इस स्टोरेज में बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हैं, जो वेस्ट एशिया के दूसरे देशों को भी निशाना बना सकती हैं. इसके अलावा तेहरान के पास क्रूज मिसाइलों की भी एक छोटी सी खेप है, जिनका इस्तेमाल जमीन या समुद्र में कम दूरी के टारगेट को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है.

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मिलिट्री इंटेलिजेंस से जुड़ी एजेंसियों ने सैटेलाइट इमेज और दूसरे सर्विलांस टेक्नोलोजी समेत कई सोर्सेज से मिली जानकारी के आधार पर बताया है कि ईरान ने देश भर में अपने लगभग 90 प्रतिशत अंडरग्राउंड मिसाइल स्टोरेज और लॉन्चिंग फैसिलिटीज तक फिर से पहुंच बना ली है. इनको अब आंशिक या फिर पूरी तरह से ऑपरेशनल माना जा रहा है.

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से मिली इन जानकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के दावों की हवा निकाल दी है. वे मार्च से ही दावा कर रहे हैं कि ईरानी सेना अब पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है. लेकिन ताजा इंटेलिजेंस इनपुट बताते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सैनिक सलाहकारों ने अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी मिसाइल साइट्स को पहुंचने वाले नुकसान को बढ़ा-चढ़ा कर बताया है.

साथ ही उन्होंने ईरान की मजबूती और फाइट बैक करने की क्षमता को बेहद कम करके आंका है. अगर ईरान और अमेरिका के बीच एक महीने से चल रहा सीजफायर टूटता है और बड़े पैमाने पर लड़ाई शुरू होती है तो फिर से ईरान अमेरिका को मजबूत चुनौती देने की स्थिति में होगा.

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