पश्चिम बंगाल के दीघा में बन रहे जगन्नाथ मंदिर को लेकर विपक्ष राज्य सरकार को घेर रहा है. राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजेपी विधायक शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि सरकारी पैसों का इस्तेमाल किसी धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए नहीं किया जा सकता. उन्होंने इसे जगन्नाथ मंदिर कहे जाने पर भी सवाल उठाया है. 11 दिसंबर को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की इस मंदिर का उद्घाटन अगले साल 'अक्षय तृतीया' (30 अप्रैल 2025) के मौके पर किया जाएगा.
पश्चिम बंगाल में जगन्नाथ मंदिर बन रहा तो BJP ममता सरकार पर क्यों भड़क रही है?
11 दिसंबर को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की इस मंदिर का उद्घाटन अगले साल 'अक्षय तृतीया' (30 अप्रैल 2025) के मौके पर किया जाएगा.


कोलकाता से करीब 180 किलोमीटर दूर दीघा, पूर्वी मेदिनीपुर जिले में समंदर किनारे बसा शहर है. यहां पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर ही बड़ा मंदिर बनाया जा रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंदिर के निर्माण की समीक्षा के लिए दीघा पहुंची हैं. यहां मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है. 10 फीसदी काम अगले तीन महीनों में पूरा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन इसका उद्घाटन किया जाएगा. इस मंदिर की ऊंचाई पुरी जगन्नाथ मंदिर की तरह ही है.
ममता ने आगे कहा,
विपक्ष ने क्या सवाल उठाया?"यहां हम एक प्रशासनिक भवन भी बना रहे हैं, जिसमें स्वास्थ्य सुविधाएं, फायर ब्रिगेड, पुलिस पोस्ट और प्रशासनिक ऑफिस बने होंगे."
ममता की इस घोषणा के बाद विपक्ष राज्य सरकार पर हमलावर है. शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में मीडिया के सामने कहा कि वह जगन्नाथ मंदिर नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि उसका नाम है - श्री जगन्नाथ धाम सांस्कृतिक केंद्र, आपको ये नहीं भूलना चाहिए. शुभेंदु ने सरकार की आलोचना करते हुए ये भी कहा कि सरकारी पैसे से मंदिर, मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा नहीं बनाया जाना चाहिए.
शुभेंदु मीडिया से कहते हैं,
"पुरी का जगन्नाथ मंदिर एक ऐतिहासिक मंदिर है. हमारी सनातनी संस्कृति में ये चार धामों में एक धाम है. जब पश्चिम बंगाल सरकार ने HIDCO (हाउसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के जरिये टेंडर निकाला था, तब इसका नाम जगन्नाथ धाम सांस्कृतिक केंद्र था. राज्य सरकार के डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, ये एक सांस्कृतिक केंद्र है ना कि मंदिर है. क्योंकि संविधान के अनुसार कोई भी सरकार धार्मिक स्थल के लिए सरकारी पैसे खर्च नहीं कर सकती है."
अधिकारी ने दावा किया कि राम मंदिर निर्माण के बाद ममता बनर्जी हिंदू समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए ये कर रही हैं. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का किसी हिंदू संगठन के साथ कोई संबंध नहीं है.
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इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि 22 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट की कीमत 143 करोड़ रुपये है. ऐसा राज्य के शहरी विकास विभाग से पता चलता है. इसका निर्माण कोलकाता के डिजाइन स्टूडियो के साथ मिलकर HIDCO ही करवा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी ने 2019 में इस मंदिर की आधारशिला रखी थी.
ममता बनर्जी ने इसी साल कहा था कि अगले साल से दीघा में जगन्नाथ रथ यात्रा भी निकाली जाएगी.
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