दिल्ली में पहले भी ऐसा 22 अप्रैल को मामला सामने आया था. जब 14 भैंसों को लेकर जा रहे रिजवान, कामिल और आशु को पीटा गया था. लोगों का कहना था कि मारने वाले मेनका गांधी के नेतृत्व वाले पशु अधिकार समूह पीपुल फॉर एनिमल्स (पीएफए) के सदस्य थे. हालांकि संगठन ने उनके खुद से जुड़े होने से इंकार किया था.
गौरक्षक इंसानों को मार रहे हैं, यहां गौशाला में 25 गाय मर गईं
गौशाला में गाय अपनी बदहाली की वजह से दम तोड़ दे रही हैं. पिछले साल ही जयपुर नगर निगम की हिंगोनिया गौशाला में एक हफ्ते के अंदर 500 गाय मरने का मामला सामने आया था. और अब हरियाणा की गौशाला में 25 गाय मर गईं. क्योंकि बारिश की वजह से गौशाला में कीचड़ ही कीचड़ है. खाने के लिए कुछ नहीं है. मथाना गांव के प्रधान का कहना है कि गौशाला में बारिश से निपटने का इंतजाम नहीं था, इस वजह से ये घटना घटी. हरियाणा गाौ सेवा कमीशन के अफसरों का कहना है कि जो गायें वहां फंसी हुई हैं, उन्हें प्रदेश की दूसरी गौशालाओं में शिफ्ट किया जा रहा है. गौशाला के प्रमुख रह चुके अशोक पपनेजा के मुताबिक गौशाला में तकरीबन 600 गायें थीं. इतनी बड़ी संख्या में पशुओं के लिए चारे और पानी का इंतजाम नहीं था.फेसबुक पर वायरल हो रहा वीडियो
गौ रक्षकों का एक और वीडियो फेसबुक पर वायरल हो रहा है. जिसमें कुछ लोग गाय ले जा रहे लोगों को पीट रहे हैं. वीडियो जिसने शेयर किया उसने इसको बिहार का बताया है. लेकिन अभी ये क्लियर नहीं हो पाया है कि वीडियो कहां और कब का है? वीडियो में धोती बांधे एक आदमी तो वाहन से कूदकर सड़क क्रॉस करके भाग जाता है. जबकि लोग उसे मारने के लिए पीछे-पीछे दौड़ते हैं. वाहन में बैठे एक आदमी को पकड़ लिया जाता है. और उसको डंडों से पीटा जा रहा है. कैमरे के पीछे से आवाज़ सुनाई दे रही है,'ये ही असली व्यापारी, मारो, मारो. ये ही मेन.'देखिए वीडियो ये ख़बरों सुनने के बाद ऐसा लगता है कि गौ रक्षकों ने सिर्फ एक कम्युनिटी को गाय के नाम पर निशाने पर ले रखा है. अगर मकसद सिर्फ गाय बचाना होता तो गौशालाओं में इतनी बड़ी संख्या में गायों को नहीं मरने दिया जाता. बीफ बैन होने पर गौकशी तो जुर्म है ही. लेकिन ये कौन सा इंसाफ है कि तुम गाय के नाम पर किसी को पीट दो. किसी की जान ले लो. किस कानून ने गौरक्षकों को गाय बचाने के नाम पर इन्सान की जान लेने की छूट दे रखी है? ये हमले देश की बहुसंस्कृति को दूषित कर रहे हैं. इन हमलों की संख्या जिस तेज़ी से बढ़ रही है. उससे लगता है कि वो दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान और भारत में कोई फर्क रह जाएगा. फिर तो ये भी नहीं कहा जा सकेगा कि पाकिस्तान चले जाओ. क्योंकि गाय के नाम पर पनप रही कट्टरता ही भारत को पाकिस्तान बना देगी. गौकशी करने वालों के लिए कानून है. फिर किसी की जान लेकर या किसी को मारकर काहे जुर्म कर रहे हो. क्या गाय की रक्षा करने वालों को भारत के कानून पर भरोसा नहीं है. भीड़ हमले कर रही है. और लोग खड़े देख रहे हैं. देश में भीड़ उन्मादी हो चुकी है. गाय को नाम पर हिंसक हो गई है. तभी तो अफवाह में भी जान ले रही है. अगर इस भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश खुद से ही नहीं की गई तो ये भीड़ कभी बच्चे चोरी की अफवाह में किसी महिला की जान ले लेगी. कभी धर्म के नाम पर एक FB पोस्ट से हिंसा भड़का देगी. तो कभी जुनैद खान की लाश लाएगी. कभी पहलू खान को मारेगी. तो कभी अलीमुद्दीन की लाश को सामने रख देगी. और कल किसका नंबर होगा नहीं पता. ये कैसे आज़ाद भारत का निर्माण कर रहे हैं हम.
ये भी पढ़िए :
क्या ये तस्वीर FB पोस्ट से बंगाल में भड़की हिंसा में हिन्दुओं पर हुए ज़ुल्म की है?






















