आज सुबह हिंदुस्तान टाइम्स अखबार खोला तो पेज नंबर 12 पर एक इश्तेहार मिला. दिल्ली पुलिस का. जिसमें लिखा था कि एक 'अज्ञात' जो 'अज्ञात' पिता का बेटा है और 'अज्ञात' जगह पर रहता है, उसने एक आदमी को धोखा देकर उसके एटीएम कार्ड से पैसे निकाल लिए. और तो और, जिस तस्वीर को दिखा कर दिल्ली पुलिस जनता से चोर को पकड़वाने की अपील कर रही है, उसमें चोर की बस परछाईं भर दिख रही है. ये रहा दिल्ली पुलिस का ऐड:

दिल्ली पुलिस अपनी स्मार्टनेस के लिए जानी जाती है. चोर को ढूंढ़ने में जनता से हेल्प मांगना अच्छी बात है. जनता हेल्प तो करे, लेकिन करे कैसे? काले बैकग्राउंड में एक सफ़ेद धब्बे को देख कर? ऐड देखने के बाद जब लल्लन ने दिल्ली पुलिस के PRO यानी पब्लिक रिलेशन ऑफिसर को फोन किया, तो उन्होंने ऐड की कॉपी मांगी. तस्वीर देख कर उनका कोई जवाब अब तक नहीं आया है. एक-दो इश्तेहार पहले भी देखे हैं. जिसमें पुलिस ने कंकालों और घासफूस की फोटो छपवाकर पहचान की अपील की है.

समझ में नहीं आता कि पुलिस सचमुच अपराधी या खोए हुए इंसान को खोजना चाहती है, या जनता और भुगतने वालों से मजाक कर रही है.