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ओपी शर्मा टीवी पर लात चलाते दिखे, FIR में 'अज्ञात' हो गए

बाकी विधायकों को फ़ौरन धर लेने वाली दिल्ली पुलिस ने कल टीवी नहीं देखा या अख़बार नहीं पढ़ा?

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फोटो - thelallantop
बीजेपी एमएलए ओपी शर्मा को हम सबने पटियाला कोर्ट के बाहर सीपीआई लीडर अमीक को हौंकते देखा. अमीक को लात घूंसे, थप्पड़, और कई गालियों का परसाद मिला. एक पुलिस वाला भी आया था बीच-बचाव करने. कायदे से तो उसे ओपी शर्मा को ऑन द स्पॉट अरेस्ट करना चाहिए था. लेकिन उसने बस अकील को पिंड छुड़ाने में मदद की. ओपी शर्मा अगले दिन किसी चैनल पर इंटरव्यू देते हुए दिखे. ओपी शर्मा कहने लगे कि गर बन्दूक होती तो गोली मार देता. टीवी पर.
उनके हिसाब से उनकी मां को कोई गाली देगा तो वो चुप नहीं बैठेंगे. कहते हैं कि ये एक रिएक्शन था अमीक के भारत-विरोधी नारों का. ओपी शर्मा का खून खौल उठा. उन्होंने टीवी पर कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की शर्म या कैसा भी पछतावा नहीं है. लॉ-मेकर से लॉ-ब्रेकर बनकर उन्होंने अपनी नज़रों में कोई ग़लत काम नहीं किया है. मैं फिर कह रहा हूँ, एक अकेले लौंडे पर भीड़ के साथ मर्दानगी दिखने वाले इन हज़रात में कश्मीर मुद्दे को सॉल्व करने के पूरे लक्खन दिख रहे हैं. ऊपर से किस्मत ऐसी कि पुलिस वाले ने गिरफ्तार भी नहीं किया.
OP Sharma saving his motherland
OP Sharma saving his motherland

कायदे से तो असाल्ट की और न जाने कैसी कैसी धाराएं लगनी चाहिए थीं लेकिन इनका जो बाल भी बांका हुआ हो. FIR भी लिखी गयी तो अगले दिन. वो भी अज्ञात लोगों के खिलाफ़. कैमरे पर दिखने वाले ओपी शर्मा FIR में अज्ञात हो जाते हैं. इससे कुछ साफ़ हो न हो ये ज़रूर साफ़ हो जाता है कि बड़ी-बड़ी शायरियां और मोटिवेशनल कोट्स कहने वाले 'अज्ञात' असल में कोई और नहीं ओपी शर्मा ही हैं.
उधर दिल्ली पुलिस कहती है कि वो उन वकीलों की पहचान करने में जुटी है जिसने लड़कों और मीडिया के लोगों को मारा. इंडियन एक्सप्रेस ने उनकी मुश्किल को हल करने के नेक इरादे से एक फोटो छापी है जिसमें तीन वकीलों की शक्लें देखी जा सकती हैं. उनके नाम भी दिए गए हैं. दिल्ली पुलिस को चाहिए कि जाके इन्हें धर दबोचे. इस बार में ABVP के लीडर सुनील अम्बेकर ने कहा है कि जो मारपीट पटियाला हाउस कोर्ट में हुई वो जनता का गुस्सा है.
The Indian Express shows the faces of men who assaulted media persons and students
The Indian Express names men who assaulted media persons and students

खैर, इस बात को किनारे रखते हैं. और आप से रिक्वेस्ट है कि किसी भी हालत में ओपी शर्मा पर दिखाई गयी ढिलाई को दिल्ली पुलिस की मक्कारी से न जोड़ लीजियेगा. दिल्ली पुलिस बहुत ही मुस्तैदी से काम करती है. आपको देखना हो तो आम आदमी पार्टी के विधायकों या कार्यकर्ताओं के खिलाफ़ की गयी कार्रवाई को देख लीजिये. आपको देते हैं एक लिस्ट जिसमें हम देखेंगे कि दिल्ली पुलिस ने जित्ती जल्दी में 'आप' विधायकों के खिलाफ़ कदम उठाये हैं, उत्ती तेजी में तो कभी किसी ने सड़क पे पड़े 10 के नोट को भी न उठाया होगा.
1. जरनैल सिंह:
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आप विधायक जरनैल सिंह के ऊपर MCD के इंजीनियर के साथ मार-पीट और काम में रुकावट डालने के लिए FIR रजिस्टर की गयी थी. MCD के जूनियर इंजीनियर जब एक गैर-कानूनी बिल्डिंग को गिराने पहुंचे तो लोकल लोगों ने हल्ला काटना शुरू कर दिया और अपने विधायक जरनैल सिंह को बुला लाये. जरनैल सिंह ने काम रोकने के लिए कहा और इंजीनियर से तू-तू मैं-मैं हो गयी. धारा लगी 186 और 353.


2. नरेश बाल्यान:
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आप विधायक नरेश बाल्यान के ऊपर तो गजब का आरोप है. आरोप वो है जिसका उनकी पार्टी के मुखिया माइक पर चीख-चीख के विरोध करते हैं - चुनाव में शराब बांटने का. वैसे तो नरेश ने किसी को शराब नहीं बांटी लेकिन उनके रिश्तेदार जिस बिल्डिंग के मालिक हैं, उस बिल्डिंग से 8 हजार शराब की बोतलें मिली थीं. वो भी ठीक 2015 के दिल्ली चुनाव से पहले.


3. राम निवास गोयल:
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शाहदरा से विधायाक राम निवास पर एक बिल्डर के घर में जबरदस्ती घुसने, मारपीट और तोड़-फोड़ के चार्ज लगे थे. बात थी 6 फरवरी 2015 की रात की. ये भी चुनावों से ठीक पहले ही हुआ था. गोयल साहब को शक था कि विवेक विहार में रहने वाले बिल्डर ने अपने घर में शराब छुपा के रखी थी जिसे वो चुनाव के पहले लोगों में वोट के बदले बांटने वाले थे. ये घुस गए घर में. FIR हो गयी. बिल्डर ने कहा कि इन्होनें ड्राईवर को मारा, घर के सामान को तोडा, खिडकियों के कांच फोड़ दिए.


4. संजीव झा और अखिलेश पति त्रिपाठी:
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आम आदमी पार्टी के जय और वीरू. इनके खिलाफ़ तोड़-फोड़ और पुलिस वालों से मारपीट का आरोप था. गिरफ्तार हुए. साथ ही छः और वालंटियर्स लपेटे गए.


5. सुरिंदर सिंह:
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सुरिंदर सिंह 'कमांडो' ने भारी आफत मोल ले ली. किसी NDMC के कर्मचारी पर किसी जाति से जुड़ी कोई बात कह दी. कर्मचारी सनक गया. काफी लोग सनक गए. बवाल हुआ. 'कमांडो' को पुलिस ने धर लिया. जेल पहुंच गए. जमानत भी न मिली.


6. जितेन्द्र सिंह तोमर:
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जितेन्द्र सिंह तोमर ने तो अपना पैर ही कुल्हाड़ी पे दे मारा था. फर्जी डिग्री का ब्यौरा दे दिया चुनाव से पहले. फंस गए. हौज़ खास में FIR लिखी गयी. 9 जून 2015 को पुलिस ले गयी. बाद में 20 जुलाई तक 14 दिन की हिरासत और बढ़ गयी.


केजरीवाल ने पहले दिन से ही ये रट लगायी हुई है कि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अंदर आती है और इसलिए उन्हीं के दबाव में काम कर रही है. वो ये भी कहते रहे हैं कि दिल्ली पुलिस उनके विषयकों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ़ ज्यादा स्ट्रिक्ट रहती है जबकि बीजेपी के लोग जो मैन में आये करते रहते हैं और मौका आने पे छूट जाते हैं.
केजरीवाल और नजीब जंग के बीच चल रहे सास-बहू के झगड़े की एक बड़ी वजह ये भी है. दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अंडर काम करना चाहिए, ऐसी आम आदमी पार्टी की मांग है. लेकिन फिर इस बात की गारंटी कौन देगा कि जो अब तक आप विधायकों के खिलाफ़ होता आया है, वो बीजेपी विधायकों के खिलाफ़ नहीं होगा. वो अलग बात है कि दिल्ली में बीजेपी के सिर्फ 3 ही विधायक हैं. हो न हो, दिल्ली सरकार के अंडर आने से दिल्ली पुली का काम आसन हो जाये.

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