''नफरत के आधार पर हमें सत्ता का सिंहासन नहीं चाहिए. ऐसी राजनीति को हम ठोकर मारते हैं. NPR को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. अगर NPR नहीं होगा तो गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं कैसे चलाई जाएंगी? DBT के माध्यम से बिना किसी हेर-फेर के गरीबों तक सब्सिडी कैसे पहुंचेगी?''राजनाथ सिंह ने कहा,
''नफरत की स्याही से इतिहास लिखने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए वरना इतिहास माफ़ नहीं करेगा. हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी इंसाफ़ और इंसानियत में विश्वास करते हैं. तभी वे कहते हैं सबका साथ सबका विकास. इसके बावजूद उन पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं.''
''इस नए कानून से वास्तविक नागरिक प्रभावित नहीं होगा. शाहीन बाग़ में कुछ विरोध प्रदर्शन हुए. इससे डर पैदा किया गया कि मुसलमानों से उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी. मैं आपसे ये कहना चाहता हूं कि आपको सरकार की पवित्रता पर संदेह नहीं करना चाहिए.''
''हम 1951 से कहते रहे कि धारा 370 को समाप्त करेंगे. हमने अपने संकल्प पत्र में भी कहा था कि सत्ता में वापस आते ही धारा 370 समाप्त करेंगे. यह काम अगस्त में चुटकी बजाते ही कर दिया गया. अब कश्मीर से विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाए जाने से कोई ताक़त रोक नहीं सकेगी.''दिल्ली के सीएम केजरीवाल को घेरते हुए उन्होंने कहा,
''जिन अन्ना हजारे जी का दामन पकड़कर केजरीवाल जी सार्वजनिक जीवन में आए थे. उन्होंने बार-बार राजनीतिक पार्टी बनाने से मना किया. मगर अन्ना हजारे को महाराष्ट्र भेज कर अरविंद केजरीवाल जी ने एक राजनीतिक पार्टी बना ली और चुनाव के मैदान में उतर गए. जो अन्ना का ना हुआ वो आपका क्या होगा?''दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा समेत कई बीजेपी नेता विवादित बयान दे रहे हैं. लोगों को भड़का रहे हैं. ऐसे में राजनाथ सिंह का ये कहना कि हमें 'नफरत' के आधार पर सत्ता का सिंहासन नहीं चाहिए स्वागत योग्य है. काश यही बात बीजेपी के अन्य नेताओं को समझ में आती.
NRC पर PM मोदी और राजनाथ सिंह कह रहे हैं अलग-अलग बात
























