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बच्चे के फेफड़े में सुई फंस गई थी, दिल्ली AIIMS के डॉक्टर ने चुंबक से कमाल कर दिया!

डॉक्टर ने बताया कि अगर चुंबक नहीं मिलता या बच्चे के फेफड़े में सिलाई की सुई दिखाई नहीं देती, तो लड़के की ओपन-हार्ट सर्जरी की जाती.

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सुई कैसे बच्चे के फेफड़े में गई, माता-पिता को नहीं पता. (सांकेतिक फोटो)

बचपन में बच्चों की आदत होती है, किसी चीज़ को हाथ में लेना फिर उसे खाने की कोशिश करना. कभी माता-पिता को पता चल जाता है और कभी नहीं. दिल्ली एम्स (Delhi AIIMS) में भी एक ऐसा ही केस आया. एक 7 साल के बच्चे के बाएं फेफड़े में सिलाई वाली सुई थी. सुई कैसे उसके फेफड़े में गई, माता-पिता को नहीं पता. लेकिन डॉक्टर्स ने सर्जरी कर चुंबक की मदद से सुई को बाहर निकाल दिया.

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न्यूज़ एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक़, तेज बुखार और खांसी के साथ खून आने के बाद परिवार वाले बच्चे को निजी अस्पताल ले गए. वहां से उन्हें एम्स दिल्ली रेफर कर दिया गया. यहां एक्स-रे से पता चला कि सुई बच्चे के बाएं फेफड़े फंसी हुई है. 1 नवंबर को बच्चे को एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया.

चुंबक का आइडिया कैसे आया? 

अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि सुई फेफड़े के अंदर इतनी गहराई तक मौजूद थी कि नॉर्मल सर्जरी करना बहुत मुश्किल था. इसलिए पूरी टीम ने पहले बात की. PTI से बातचीत के दौरान बाल चिकित्सा विभाग (Paediatric Department) के एडिशनल प्रोफ़ेसर डॉ विशेष जैन ने बताया,

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“ऐसे केस में हम ब्रोंकोस्कोपी के जरिए ऑपरेशन करते हैं, लेकिन यहां चुनौती यह थी कि यह (सुई) फेफड़ों में अधिक गहराई तक थी, जिसका मतलब था कि ऑपरेशन के दौरान हमारे उपकरणों का उपयोग करने के लिए हमारे पास कम जगह थी. फिर हमारे मन में एक चुंबक का उपयोग करने का विचार आया, जिसे हमने खरीदा चांदनी चौक से. हम एक जानकार के पास पहुंचे और चुंबक खरीद लिया. अगर चुंबक नहीं मिलता या बच्चे के फेफड़े में सिलाई की सुई दिखाई नहीं देती, तो लड़के की ओपन-हार्ट सर्जरी की जाती. इसलिए हमने 4 मिमी चौड़ाई और 1.5 मिमी मोटाई वाले चुंबक की मदद से ये काम किया.”

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सर्जरी में आनी वाली दिक्कतों के बारे मे बात करते हुए डॉ. जैन ने आगे कहा कि सबसे पहली चुनौती आई कि कैसे चुंबक को सुई वाली जगह लेकर जाया जाए. इसलिए उनकी टीम ने एक डिवाइस बनाई. जिसमें चुंबक को धागे और एक रबर बैंड का उपयोग करके चिपका दिया गया. उन्होंने कहा, 

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"टीम ने बाएं फेफड़े के अंदर सुई की जगह जानने के लिए विंडपाइप की एंडोस्कोपी की. जिससे उन्हें शुरू मे केवल टिप दिख रही थी. बाद में चुंबक वाली डिवाइस को अंदर डाला गया. और यह सब एकदम मैजिकल लग रहा था. क्योंकि सुई चुंबकीय बल पर प्रतिक्रिया कर रही थी, आसानी से अपनी छिपी हुई जगह से बाहर निकल रही थी. इसे सफलतापूर्वक निकाला गया. बाद में बच्चे को छुट्टी भी दे दी गई.''

डॉ. जैन ने आगे कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां बच्चे अजीब चीजें निगल लेते हैं. कुछ समय पहले, उनके पास एक 9 महीने के बच्चे का मामला आया था जिसने झुमका खा लिया था. उसे भी डॉ जैन ने ही निकाला था. एक दूसरी घटना में, एक चार साल के बच्चे ने जूते की सीटी निगल ली थी.

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