जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने अपने आदेश में कहा,
'हम केन्द्र सरकार को इस समय यह योजना लागू करने की व्यावहारिकता पर विचार करने और हालात को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला लेने का निर्देश देते हैं.'याचिका में क्या मांग की गई थी?
वकील रीपक कंसल ने याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि लॉकडाउन की वजह से अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग राज्यों के कामगार और दूसरे लोग फंसे हुए हैं. उन्हें लाभ देने के लिए योजना शुरू करने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया जाए. याचिकाकर्ता ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रवासी श्रमिकों, लाभार्थियों, राज्यों के निवासियों और पर्यटकों के हितों की रक्षा करने की जरूरत बताई थी. साथ ही ऐसे लोगों को रियायती खाद्यान्न और सरकारी योजना के लाभ दिलाने के लिए अस्थायी रूप से 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' योजना अपनाने के लिए कोर्ट से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था.
'वन नेशन, वन राशन कार्ड' योजना इस समय 12 राज्यों में लागू है. (प्रतीकात्मक फोटो)कंसल ने दावा किया था कि राज्यों और केन्द शासित प्रदेशों की सरकारें अपने निवासियों और मतदाताओं को प्राथमिकता दे रही हैं. वे प्रवासी मजदूरों ओर दूसरे राज्यों के निवासियों को रियायती दाम पर खाद्यान्न, भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधाओं के लाभ नहीं दे रही हैं.
कंसल ने तर्क दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें ऐसे सभी व्यक्तियों को भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता देने के लिए बाध्य हैं. साथ ही ऐसा करने के लिए उन्हें बिना किसी भी भेदभाव के सभी मानव जीवन को बचाने के लिए 'वन नेशन, वन अम्ब्रेला' (ONOU) को अपनाना होगा.
'वन नेशन, वन राशन कार्ड' योजना कई राज्यों में लागू है. पूरे देश में इसे एक जून से लागू होना था.
क्या है ये योजना?
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. पूरे देश में लागू होने के बाद कोई भी कार्डधारक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत किसी भी राज्य की राशन की दुकान से अपने हिस्से का राशन ले सकेगा. मान लीजिए कि कोई यूपी का है. उसका राशन कार्ड यूपी में बना है, लेकिन बिहार में काम करता है. ऐसे में वह यूपी के राशन कार्ड से बिहार में राशन ले सकेगा. इस योजना के तहत पीडीएस के लाभार्थियों की पहचान उनके आधार कार्ड पर 'इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल डिवाइस' से की जाती है, जिसमें लाभार्थियों से संबंधित विवरण फीड किए गए हैं.
इन राज्यों में लागू है योजना
1 जनवरी, 2020 से देश के 12 राज्यों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गोवा, झारखंड और त्रिपुरा में 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' की सुविधा की शुरुआत की गई थी. इस योजना के तहत सरकार 10 अंकों का राशन कार्ड नंबर जारी करती है. सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा. फर्जी राशन कार्ड नहीं बन पाएंगे.
केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देशभर में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को सस्ते दाम पर खाद्यान्न मुहैया करवाती है.
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