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कांग्रेसी नेताओं की छोले भटूरे की प्लेट का सच जानेंगे तो सोशल मीडिया छोड़ देंगे

कांग्रेस के नेताओं ने भी मान लिया था कि यहां छोला भटूरा पार्टी हो रही है, लेकिन सच कुछ और था.

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फोटो - thelallantop
यकीन मानिए इस छोले भटूरे से बड़ी अफवाह वो भी नहीं थी जब लोग कहते थे कि दिसंबर 2012 मे दुनिया खत्म हो जाएगी. बहुत बड़ी साजिश की गई है आपके साथ. आपने सोशल मीडिया पर भरोसा किया. धड़ाधड़ पोस्ट और मैसेज किये. बिना सच्चाई जाने. दरअसल इस थाली में छोले भटूरे थे ही नहीं. कांग्रेसी नेता क्या, कोई भी उस टाइम वहां छोले भटूरे नहीं पा सकता था. क्योंकि दिल्ली के फतेहपुरी चौक में जो ये चैनाराम हलवाई की दुकान है, यहां एक बजे से पहले छोले भटूरे मिलते ही नहीं. सुबह 8 बजे दुकान खुल जाती है. तब मिलती है पूड़ी और छोले. कुछ लोग पूड़ी को पूरी भी कहते हैं लेकिन हमने हमेशा पूड़ी सुना है इसलिए पूड़ी ही कहेंगे. सॉरी हां. सारी भसड़ जहां से शुरू हुई, वो ट्वीट.
हमने गूगल बाबा की मदद से चैनाराम की दुकान का नंबर खोजा. उधर से जिन भाई साहब ने उठाया उनकी भावनाएं बहुत आहत थीं. वो बड़े गुस्से में थे. कह रहे थे यार तुम मीडिया वाले पहले सब लिख पढ़ कर बराबर कर देते हो. टीवी पर चला देते हो. उसके बाद सच्चाई पूछते हो. हमने पूछा कि 'इन नेताओं के साथ राहुल गांधी भी आए थे क्या?' भैया हत्थे से उखड़ गए. कहा कि 'आपको फोटो में दिख रहे हैं? अगर नहीं दिख रहे तो क्या उनका भूत आकर यहां पूड़ी छोले खा गया?'
एक्स्ट्रा सब्जी और मिनरल वॉटर
एक्स्ट्रा सब्जी और मिनरल वॉटर

इतना गुस्से में होने के बावजूद भाई ने बड़ी शांति से बात की. बिना गरियाये. पता चला कि ये चैनाराम की पांचवी पीढ़ी है, जो दुकान संभाल रही है. 117 साल पुरानी दुकान है. दुकान के मालिक फिलहाल हरीश गिड़वानी हैं जो मॉडल टाउन में रहते हैं. इनके परदादा लाहौर में रहते थे और वहां के अनारकली बाजार में पहले ये दुकान थी. लेकिन फिर सन 47 में बटवारा हुआ. सब तहस नहस हो गया. पूरा खानदान माइग्रेट होकर दिल्ली आ गया और यहां दुकान खुली. इतनी फेमस होने के बावजूद इन्होंने अपनी कोई ब्रांच नहीं डाली है. छोले भटूरे तो वायरल हो गए लेकिन यहां सबसे ज्यादा मिठाइयां फेमस हैं. पुरानी दिल्ली इलाके में तो ये दुकान पहले ही फेमस थी. अब पूरे भारत में वर्ल्ड फेमस हो गई.
पूड़ी छोले और भटूरे छोले में फर्क
1. पूड़ी और भटूरे दोनों मैदे के बनते हैं और दोनों धांसू बनते हैं. पूड़ी के अंदर दाल भरी रहती है और भटूरे में पनीर.
2. लेकिन भटूरे के साथ जो छोले मिलते हैं उनका साइज होता है छोटा और रंग हल्का काला. पूड़ी वाले छोले में पानी ज्यादा होता है अर्थात ग्रेवी पतली होती है, भटूरे वाले में ग्रेवी भारी.
3. पूड़ी छोले के साथ अचार मिलता है और मेथी की चटनी. छोले भटूरे के साथ सलाद मिलती है.
4. अब बात रेट और टाइमिंग की. दोनों का रेट है 90 रुपए. दो पीस पूड़ी या भटूरे आते हैं एक प्लेट में.(हमने कहा गुरू ये तो बहुत महंगा है तो लाचार बनने की एक्टिंग करते हुए भैया कहने लगे कि आप जो कह दो वही सही है. दुकान भी तो महंगी जगह पर है.) टाइमिंग का ये है कि दोपहर एक बजे से चार बजे तक छोले भटूरे मिलते हैं.
यानी कांग्रेसी नेताओं पर लगाया गया इल्जाम पूड़ी तरह मनगढ़ंत और बेबुनियाद है. उन्होंने छोले भटूरे खाए ही नहीं.


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