
नीरू और अरमान, तस्वीर इंस्टाग्राम से
अरमान कोहली - एक अनोखी कहानी
2002 में वैसे तो बहुत कुछ हुआ था, जिसे देश आजतक भुला नहीं पाया है. दिल्ली में मेट्रो शुरू हुई थी. यशवंत सिन्हा ने बजट पेश किया था. अप्रैल में बैंक वालों ने हड़ताल कर दी थी एवं 'अन्य'. लेकिन कुछ बातें ऐसी हुईं जिनका जिक्र बार-बार होता है. ऐसी ही बातों में एक है एक फिल्म का आना. 'जानी दुश्मन- एक अनोखी कहानी'. ये फिल्म नहीं थी, सिनेमा में नए युग का सूत्रपात था. इस फिल्म ने दिखाया कि कैसे टर्मिनेटर वाले समय में आगे आकर हमारी फिल्मों के क्लाइमैक्स चुरा ले जाते हैं. इस फिल्म ने बताया कि क्यों फोन में कॉलर आईडी होनी जरूरी है. इस फिल्म ने बताया कि क्यों इंसान को सुहागरात को लेकर ज्यादा एक्साइटेड नहीं होना चाहिए. फिल्म की महानता को एक उदाहरण से समझिए. अक्षय कुमार टीवी देख रहे हैं. टीवी के पर्दे के पार से अमन वर्मा बाहर निकल आते हैं. टेलीविजन के सामने टेलीपोर्टेशन 'लिटरल' हो पड़ता है. अगले ही पल वही अमन वर्मा, अरमान कोहली में बदल जाते हैं. डायलॉग गूंजता है. "मैं वही हूं, अपनी मौत को अपने सामने देखकर तू ये जान गया होगा कि तेरी मौत का वक़्त नजदीक आ गया है.' श्लेष अलंकार ब्रो!

एक अरमान सबसे बलवान, जानी दुश्मन
'जानी दुश्मन' दिव्य फिल्म थी. कालातीत फिल्म थी. टेक्नॉलॉजीतीत फिल्म थी. रेप्टाइल प्रेम की महागाथा थी. अरमान कोहली की फिल्म थी. वो फिल्म जिसमें जीता-जागता आदमी. सॉरी, जीता-जागता सांप, सॉरी, मर कर ज़िंदा हुआ सांप जो आदमी बना है, वो दौड़ते-दौड़ते मोटर साइकल बन जाता है. इतना सब किसलिए? गर्लफ्रेंड के लिए दोस्त!

एक अनोखी कहानी
जो गर्लफ्रेंड के बदले के लिए लोगों को मार देता था
'जानी दुश्मन' में अपनी पिछली जन्म की शापित और सांपित गर्लफ्रेंड को इस जन्म में मारने वालों से बदला लेने के लिए रेप्टाइल अरमान इतने जतन कर रहे थे. (यहां से विषयांतर होगा, पाठक याद रखें, हम यहीं से वापस लौटेंगे!) बदले से याद आया, अरमान की पहली फिल्म भी यही थी. 'बदले की आग'. साल 1982. बतौर बाल कलाकार. पापा राजकुमार कोहली फिल्म के डायरेक्टर थे. ये वो समय था, जब चंबल और फिल्मों में डाकू बहुत होते थे. फिल्मों में डाकू होते तो उनका रोल करने में संजय दत्त के पापा बिजी बहुत होते थे. इस फिल्म में भी डाकू लखन सुनील दत्त बने थे. उनके जो बचपन का रोल किया था, वो अरमान कोहली ने किया था.

बाल अरमान
अरमान कोहली बड़ी तारीख को पैदा हुए थे. 23 मार्च को. 'मेरा रंग दे बसंती चोला'. साल 1972 था. अरमान ने जो किया दस-दस साल के अंतराल पर किया. 1972 में पैदा भए. 1982 में चाइल्ड आर्टिस्ट भए. 1992 में हीरो भए, पहली फिल्म आई 'विरोधी'. बॉक्स ऑफिस में फिल्म का वही हाल रहा जो आजकल देश में विरोधी पार्टियों का है. डूबती नज़र आई. लेकिन, लेकिन, लेकिन "गुरुत्वाकर्षण बल से सेब गिरते हैं और दस साल में पिटे एक्टर के दिन फिरते हैं". 10 साल बाद यानी 2002 में अरमान कोहली 'जानी दुश्मन' कर अमर भए.
कोहली परिवार - दुश्मनी से दोस्ती
अब आते हैं उस बात पर, जो आप पढ़ना चाहते हैं. विवाद. अरमान कोहली के जीवन में दुश्मन का बड़ा प्रभाव रहा है. उनकी कम से कम 4 फिल्म में दुश्मन शब्द आता है. 'दुश्मन ज़माना', 'औलाद के दुश्मन', 'दुश्मनी' और कालजयी 'जानी दुश्मन'. इत्ता ही नहीं उनके पापा का भी फेवरेट शब्द दुश्मन ही रहा लगता है, 1979 वाली जानी दुश्मन और 1987 में 'इंसानियत के दुश्मन' वो आलरेडी बना चुके थे.

जानी दुश्मन का अरमान
अरमान कोहली जो शाहरुख ही हो सकते थे, सलमान बनते-बनते रह गए
कहते हैं कि शाहरुख खान वाली 'दीवाना' में पहले अरमान कोहली होने वाले थे, नहीं हो सके. शाहरुख की ही 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' में भी अरमान कोहली होने वाले थे, नहीं हो सके. लिखे हुए शब्दों का सही मतलब पढ़ें, डीडीएलजे में अरमान कुलजीत का रोल करने वाले थे. राज का नहीं!

सलमान, अरमान
लैंड क्रूजर सिर्फ सलमान के पास नहीं थी, अरमान के पास भी थी. इन दोनों के नाम में बस 'मान' और हाथ में लैंड क्रूजर होना ही कॉमन नहीं था. हिट एंड रन भी कॉमन रहा. भाई के 'ड्राइवर की मिस्ट्री' को जन्म लिए अभी 4 महीने भी नहीं हुए थे कि दिसंबर 2002 में अरमान कोहली ने अपनी लैंड क्रूजर एक आदमी पर चढ़ा दी. मोटर साइकिल से जाते बिजॉय कादविल को अंधेरी के पास आरती जंक्शन पर अरमान की लैंड क्रूजर छुआ गई. सीधे पैर में कई फ्रैक्चर हुए. बिजॉय ने अरमान को पहचान लिया क्योंकि बिजॉय ने अरमान की फ़िल्में देख रखीं थीं. ये बिजॉय के साथ हुई दूसरी त्रासदी थी, पहली अरमान की फ़िल्में देखना रही होगी.
गर्लफ्रेंड्स, मार और अरमान
विषयांतर के बाद पाठक यहां लौटें. हम बात कर रहे थे कि 'जानी दुश्मन' में एक्स जन्म की गर्लफ्रेंड का बदला लेने के लिए अरमान सोनू निगमों, अक्षय कुमारों, सुनील शेट्टियों और आफताब शिवदासानियों को मार रहे थे. लेकिन असल जीवन में अरमान ने गर्लफ्रेंडों को इतना प्रेम नहीं किया. गर्लफ्रेंड्स से उनके जैसे रिश्ते रहे, टीवी वाले ये खबर 'गर्लफ्रेंड का जानी दुश्मन' हेडर लगाकर चलाते.

आयेशा जुल्का
अरमान का पहला नाम जिस ऐक्ट्रेस से जुड़ा वो आयशा जुल्का थीं. इन दोनों ने साथ में 3 फ़िल्में की थीं. कही-सुनी बातें ये हैं कि आयशा और अरमान रिलेशन में थे. लेकिन अरमान के गुस्सैल स्वभाव के कारण आयशा उनसे उतनी ही दूर चली गईं, जितनी आयशा जुल्का से दूर फ़िल्में जा चुकी थीं. इन दोनों के रिश्ते अंतिम दिनों में कितने अच्छे थे, ये इस बात से समझिये कि बाद के दिनों में जब अरमान अन्य विवादों में फंसे तो आयशा जुल्का ने कहा भी था कि 'अगर किसी औरत ने ये कहा है कि अरमान कोहली ने उसे पीटा तो पीटा ही होगा.
मुनमुन दत्ता
गर्लफ्रेंड्स और अरमान की मारपीट का रिश्ता उतना ही पुराना है, जितना स्लमडॉग मिलेनियर और जय हो वाला गाना. उस साल यानी 2008 में अरमान कोहली की गर्लफ्रेंड होती थीं मुनमुन दत्ता. जानने वाले उन्हें 'तारक मेहता का उलटा चश्मा' वाली 'बबिताजी' के नाम से जानते हैं. अरमान कोहली ने मुनमुन दत्ता के साथ भी मारपीट की थी. बताते हैं कि अरमान ने मुनमुन के साथ वैलेंटाइंस डे के दिन मारपीट की थी. बदले में मुनमुन ने पुलिस में उनकी शिकायत की और अरमान को अपने इस व्यवहार के लिए फाइन भरना पड़ा था.

मुनमुन दत्ता
नए लेमनचूस और फुंके हुए कारतूस दोनों का एक ठिकाना जरूर होता है. लेमनचूस किराने की दुकान पर मिल जाते हैं और फुंके कारतूस बिग बॉस के घर में. करियर की कब्रगाह बिग बॉस में जब अरमान पहुंचे तो साथ-साथ उनका गुस्सा भी पीछे-पीछे पहुंच गया. कहने को वहां काजोल की बहन तनिषा मुखर्जी से उनका प्रेम चल रहा था पर जागरूक जनता को वो हिंसा से कम नज़र न आता. वो अक्सर तनिषा को धकियाते और उन पर खीझते नज़र आते. ये साफ़ दिख रहा था कि अरमान कोहली के साथ कुछ टेंपर इश्यूज हैं, जो आसपास के लोगों के लिए उन्हें असुरक्षित बनाते हैं.

अरमान कोहली और तनीषा
ऐसे ही एक रोज़ बिग बॉस में उन्होंने सोफिया हयात को पोंछे के हत्थे से मुंह पर मार दिया. सोफिया पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश अभिनेत्री थीं. बिग बॉस के घर से निकलीं तो पुलिस स्टेशन जा पहुंचीं. अरमान कोहली बिग बॉस के घर से धरे गए. लोनावला पुलिस ने उन्हें बिग बॉस के स्टूडियो से उठाया तो दुनिया को भी कन्फर्म हुआ, अच्छा! बिग बॉस का घर लोनावला थाना क्षेत्र में आता है.

सोफिया -अरमान की लड़ाई
फरारी के दिनों में अरमान कोहली नंबर बदल-बदलकर बातें कर रहे थे. नीरू को सॉरी भी कह रहे थे. लेकिन एक बार फिर लोनावला पुलिस के हत्थे चढ़ गए. गए थे नया सिमकार्ड लेने, वहीं किसी ने पहचान लिया तो धरे गए. मेरी बात सही साबित हुई, ये मोबाइल का चक्कर ही अंत में सबको फंसाता है. फिलहाल आख़िरी अपडेट यही है कि वो न्यायिक हिरासत में रहेंगे. 26 जून तक रहेंगे. 13 जून को जब कोर्ट में पेशी हुई तो नीरू बदल गईं. अपना केस वापस ले लिया. खुद रोती रहीं लेकिन आपसी सहमति से केस वापस ले लिया, कम कहे को ज्यादा समझिएगा. समझदारी के लिए हिम्मत की जरुरत होती है, सबके पास नहीं होती. इधर से अरमान ने बेल एप्लीकेशन लगाईं. लेकिन बांद्रा कोर्ट ने मना कर दिया. कहा, नहीं! 26 जून तक जेल में रहेंगे.
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