इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए क्लाउड एयरोसोल इंटरेक्शन एंड एक्सपेरिमेंट एनहैंसमेंट एक्सपेरिमेंट (सीएआईपीईएक्स) के सीनियर साइंटिस्ट ने कहा कि धुंध को छांटने के लिए और हल्की सी भी बारिश करवाने के लिए पहले प्रदूषण के बारे में स्टडी करनी होगी.
दिल्ली में बढ़ते एयर पॉल्यूशन की वजह से इसके लिए पहले ही कैंपेन शुरू कर दिया गया था. पिछले साल दिल्ली एअरपोर्ट पर एक टॉवर लगाया गया था, जिससे कोहरे की डायनेमिक्स (गतिकी) को समझा जा सके. इसके अलावा एयरोसॉल की भी स्टडी करनी होगी. एयरोसॉल हवा में घुले हुए कण होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि हमें धुंध को छांटने के लिए इसकी केमिस्ट्री समझनी होगी. कोहरे के कण बढ़ते नहीं है. वो बस हवा में घुले रहते हैं. इसमें नमी मौजूद होती है और हमें एयरोसॉल की मदद से इसके कण बड़े करने होंगे और पानी की बूंदें बनानी होंगी. फिर इन बूंदों को भारी करके बारिश करानी होगी. लेकिन क्लाउड सीडिंग में इस बात की गारंटी नहीं है कि बारिश होगी ही. इसमें बस बादलों की क्षमता बढ़ाई जाती है. विन्सेंट शैफर (1906-1993) ने 1946 में क्लाउड सीडिंग के बारे में बताया था. वो और नोबेल पुरस्कार विजेता इरविंग लैंगमर माउंट वाशिंगटन पहाड़ पर चढ़ रहे थे तभी उनके बीच इस बारे में बात हुई थी. इसका पहली बार अमेरिका में प्रयोग किया गया. बहुत अच्छा रिजल्ट नहीं रहा. इसके बाद चाइना, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया ने भी इसका प्रयोग किया लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली. ऑस्ट्रेलिया में ये सिस्टम मैदानों में तो नहीं चला लेकिन तस्मानिया आइलैंड में सफल रहा.
क्लाउड सीडिंग में सबसे ज्यादा खर्च चाइना करता है. भारत को चाइना ने क्लाउड सीडिंग टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट भी की है. चाइना ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में क्लाउड सीडिंग का प्रयोग किया था. इंडिया में भी इसका इस्तेमाल किया जा चुका है. 1983, 1984-87, 1993-94 में तमिलनाडु सरकार ने भयंकर सूखे की वजह से इसका प्रयोग किया. 2003 और 2004 में कर्नाटक सरकार ने भी इसकी शुरुआत की. महाराष्ट्र ने भी इसी साल इसकी शुरुआत की. 2008 में आंध्र प्रदेश के 12 प्रदेशों में इसका प्लान बनाया गया. इसके अलावा इंडोनेशिया, कुवैत, यूनाइटेड अरब अमीरात, अफ्रीका में इसका इस्तेमाल किया गया है. इसके नुकसान भी हैं. केमिकल के प्रयोग की वजह से पॉल्यूशन बढ़ सकता है और सबसे बड़ा नुकसान तो यही है कि बारिश हो न हो, कोई गारंटी नहीं. ये एक ऑप्शन भर है. स्थिति खराब होने पर हर ऑप्शन पर गौर किया जाना जरूरी है. हो सकता है ये सफल हो जाए और लोगों को बड़ी राहत मिल जाए. देखते हैं. इसे और अच्छे से समझने के लिए ये देखें- https://www.youtube.com/watch?v=imZ8XxdhhF0 ये स्टोरी निशान्त ने की है.













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