NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में उठा विवाद अभी थमा नहीं है. अब चीन ने भी इसे लेकर भारत पर तंज कसा है. चीन ने अपने नेशनल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट ‘गाओकाओ’ (Gaokao) की तुलना भारत के JEE और NEET एंट्रेंस टेस्ट से की है. उसने कहा कि ‘गाओकाओ’ में करीब 1.3 करोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया और बिना किसी गड़बड़ी के यह परीक्षा संपन्न कराई गई.
हमने 1.3 करोड़ छात्रों का एग्जाम बिना गड़बड़ी के कराया... NEET पेपर लीक पर चीन ने कसा तंज
China ने अपने नेशनल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट 'Gaokao' की तुलना भारत के JEE और NEET एंट्रेंस टेस्ट से की. चीन ने कहा कि ‘गाओकाओ’ में करीब 1.3 करोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया और बिना किसी गड़बड़ी के यह परीक्षा संपन्न कराई गई.


भारत में चीनी दूतावास ने बुधवार, 10 जून को बताया कि चीन में फैक्ट्रियों ने काम रोक दिया, सड़कें खाली कर दी गईं और पूरा देश स्टूडेंट्स के साथ खड़ा रहा ताकि एग्जाम बिना किसी रुकावट के हो सके. चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा,
"चीन की 'गाओकाओ' परीक्षा - जो दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा है और भारत की JEE और NEET परीक्षाओं के बराबर मानी जाती है - 1.3 करोड़ छात्रों के लिए सिर्फ दो दिनों में बिना किसी अड़चन के आयोजित की गई. फैक्टरियां रुक गईं, सड़कें शांत हो गईं. पूरा देश अपने छात्रों के समर्थन में एकजुट हो गया."

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क्या है Gaokao Exam?चीन में ‘गाओकाओ’ को दुनिया की सबसे कठिन और बड़ी परीक्षाओं में गिना जाता है. यूनिवर्सिटीज में एंट्री का रास्ता इसी एग्जाम से होकर गुजरता है. इस साल की परीक्षा दो दिनों तक चली, जिसमें देश भर से लगभग 1.3 करोड़ उम्मीदवार शामिल हुए.
भारत में जहां CUET, NEET और JEE अलग-अलग होते हैं, वहीं ‘गाओकाओ’ यूनिवर्सिटी एडमिशन प्रोसेस को एक ही नेशनल एग्जाम में मिला देता है. NEET में हर साल आम तौर पर 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल होते हैं, जबकि JEE Main में लगभग 15 लाख उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं. वहीं, CUET (UG और PG) मिलाकर हर साल लगभग 15 से 16 लाख स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल होते हैं. अगर इन तीनों को मिला भी दिया जाए, तब भी यह संख्या ‘गाओकाओ’ परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या से काफी कम रहती है.
हालांकि, दोनों देशों के लाखों छात्रों के लिए इन परीक्षाओं का महत्व एक जैसा ही है. बीजिंग ने गाओकाओ की तुलना NEET और JEE से करके यह दिखाने की कोशिश की है कि चीन का एग्जामिनेशन सिस्टम कितना बेहतर है, जबकि भारत के लिए चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. खबर लिखे जाने तक भारत की तरफ से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
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